Monday, March 27, 2017

बीजेपी नेता की गुंडई,बैंक मैनेजर के अकाउंट से निकलवाए 66000,घटना उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी ज़िले की


विशेष संवाददाता
कौशाम्बी:केंद्र में भले ही मोदी सरकार ने दबंगई और भ्रष्टाचार को लेकर अपने मंत्रियों की खटिया खड़ी कर दी हो लेकिन राज्य में उनकी ही पार्टी के विधायक अब पूरी तरह से मोदी और योगी दोनों की लुटिया डुबाने के लिए मैदान में उतर चुके हैं।घटना चायल विधान सभा क्षेत्र की है जब 10 लाख रूपए के लोन सेंक्शन न होने पर चायल विधान सभा क्षेत्र के नवनिर्वाचित बीजेपी विधायक संजय कुमार गुप्ता अपने लाव लश्कर के साथ बैंक में पहुंचे और और उस व्यक्ति को जिसने बैंक से 10 लाख के

लोन के लिए आवेदन किया था उसका लोन सेंक्शन न होने की वजह से विधायक सत्ता के नशे मे चूर बैंक मैनेजर को जमकर खरी खोटी सुनाई और लोन के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति और उसके पिता की इसी बैंक मे दो बीमा पॉलिसी के 66000 रूपए वापस करने के लिए कहा।चूंकि IRDA के नियम के अंतर्गत समय से पहले पॉलिसी के पैसे वापस नहीं किए जा सकते लेकिन विधायक ने नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए बैंक मैनेजर के खुद के अंकाउंट से 66000 रूपए देने के लिए कहा और मैनेजर ने अपन खाते से 66000 की रकम पॉलिसी खरीदने वाले को दे दिए।इस दौरान संबंधित थाना कोखराज थाना के इंचार्ज दिनेश सिंह भी मौजूद थे लेकिन विधायक उस दौरान अपने आपको राज्य के सीएम से कम नहीं समझ रहे थे।
क्षेत्रीय ग्राणीण बैंक मूरत गंज शाखा के प्रबंधक उमेश चंद्र कक्कड़ न बताया कि नोटबंदी के समय संदीप कुमार मौर्या ने खादी ग्राम उद्दोग मंझनपुर से 10 लाख रूपए के लोन सेंक्शन के लिए अपनी फाइल भेजी लेकिन खादी ग्राम उद्दोग की तरफ से जो गाइड लाइंस थी उसमें लोन की सीमा 5 लाख की ही थी।इस वजह से फाइल को क्षेत्रीय ग्राणीण बैंक मूरत गंज शाखा ने आवेदक को वापस कर दिया एक हफ्ते बाद वही फाइल फिर से करेक्शन कर के बैंक मे लोन सेंक्शन के लिए दी गई।

नोटबंदी के बाद से बैंक में ओवर लोड कार्य होने की वजह से और कैश की समस्स्या की वजह से ब्रांच मैनेजर इस लोन के लिए सर्वे करने में असमर्थ रहे और पॉलिसी को लेकर चुंकि बैंक से ही ग्राहकों को बताया जाता है उसी दौरान संदीप कुमार मौर्या ने अपने और अपने पिता के नाम पर एक एक इंशूरेंस पॉलिसी खरीदी जिसमें एक पॉलिसी 25000 की थी और एक उनके पिता के नाम पर जो खरीदी गई थी वह 41000 की थी।बैंक की वीडियो मे ंविधायक बैंक मैनेजर पर इस बात का आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने लोन सेंक्शन नहीं किया बल्कि उन्हें पॉलिसी बेच दी।
बुधवार को संदीप ने लोन न मिलने के लिए डीएम के पास शिकायत की और कहा कि उनका लोन सेंक्शन नहीं हो रहा है जिसके बाद एल.डी.एम ने बैंक मैनेजर से बात की और कहा कि नियम और कायदे को देखते हुए इनके द्वारा आवेदन की गई लोन की फाइल देख कर उसपर विचार करें जिसके बाद शाखा प्रबंधक ने दूसरे दिन संदीप मौर्या के उस पते पर पहुंचे जिस पर उन्होंने लोन अप्लाई किया था।सर्वे करने के दौरान शाखा प्रबंधक बैंक वापस आगए तब संदीप मौर्या ने यह कहकर धमकी दी की अभी 15 मिनट बाद विधायक के साथ आऊंगा और तुम्हें देख लूंगा।और आज ठीक 2 बजे चायल विधान सभा के विधायक संजय कुमार गुप्ता अपने लाव लश्कर के साथ बैंक में आधमके और मैनेजर पर विधायकी रुआब झाड़ते हुए जमकर खरी खोठी सुनाई और लोन न देने की सूरत में  जिले से ताबदला करने की धमकी दे डाली।इतना ही नहीं दबंगई की सीमा पार करते हुए विधायक ने यह कहते हुए कि संदीप मोर्या जिन्होंने लोन के लिए आवेदन किया है और पॉलिसी खरीदी है वह राज्य के बीजेपी नेता का भतीजे हैं उनका बीमा का पैसा वापस करने के लिए दबाव बनाने लगे।जिसके बाद शाखा प्रबंधक ने अपने खाते से वह पैसे वापस किए।चूंकि IRDA के नियम के अनुसार खरीदी गई पॉलिसी के पैसे 5 साल से पहले नहीं वापस किए जासकते लेकिन विधायक को नियम कानून की कहां पड़ी वह तो बस सत्ता के नशे मे चूर थे।जिस दौरान बैंक में विधायक रुआब दिखा रहे थे उस दौरान की वीडियो रिकार्ड की गई है जिसे फेसबुक पर उन्होंने लोड किया ताकि जनता की वाहवाही लूटी जासके और उनकी दबंगई के किस्से आम होजाऐं लेकिन सोशल साइट्स पर उनकी इस हरकत को लेकर जमकर थू थू हो रही है।बात चीत में शाखा प्रबंधक ने बताया कि तकरीबन 10 साल पहले जब विधायक संजय कुमार गुप्ता ने उनसे लोन के लिए आवेदन किया था और उन्हें लोन नहीं मिल सका जिसकी वजह वह अब सत्ता मे रहकर उसकी भड़ास निकाल रहे हैं।
इस बारे में एसओ कोखराज थाना के इंचार्ज दिनेश सिंह से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि हम इस बारे में कुछ नहीं बोल सकते क्योंकि मामले में सत्ताधारी सरकार के विधायक हैं और मैं उनके विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोल सकता।
वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें




Saturday, March 25, 2017

योगी सरकार का बड़ा फैसला, इन चार शहरों को चौबीस घंटे मिलेगी बिजली

मथुरा (जेएनएन)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ योगी ने तय किया है कि हिंदुओं के चार पवित्र शहरों अयोध्या, मथुरा, वाराणसी और गोरखपुर में 24 घंटे बिजली आपूर्ति मिलेगी।
शनिवार को उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा, ‘मथुरा, वाराणसी, अयोध्या और गोरखपुर अब बिजली कटौती से मुक्त रहेंगे तथा इन जिलों में आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए यहां चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।’ उन्होंने कहा कि उनका विभाग 2019 तक राज्य के बाकी हिस्से में 24 घंटे बिजली मुहैया कराने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों से 15 दिन के भीतर वर्तमान खामियों को ठीक करने के निर्देश दिये गए हैं। श्री शर्मा कहा कि पुराने ट्रांसफर भी बदले जाएंगे।

ऊर्जा मंत्री ने कहा, ‘अब पैसे की कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि सरकार ने बीपीएल श्रेणी में आने वाले लोगों के लिए मुफ्त बिजली कनेक्शन देने शुरू कर दिए हैं।’उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने योगी आदित्यनाथ के रूप में उत्तर प्रदेश को एक मजबूत मुख्यमंत्री दिया है जो विकास पर केंद्रित एक बेहतर प्रशासन देने को लेकर प्रतिबद्ध हैं।
वहीं एंटी रोमियो दस्ते पर, उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार गंभीर है जिसमें महिलाओं के प्रति किसी भी तरह के दुर्व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक बैठक में अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ गरीबों तक अवश्य पहुंचना चाहिए तथा जिला अस्पतालों में मरीजों को दवा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को लेकर सरकार 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है।

Friday, March 24, 2017

मुख्यमंत्री योगी का नया फरमान, अब राज्यकर्मियों की लगेगी बायोमीट्रिक हाजिरी

लखनऊ (जेएनएन)। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने राजकीय विभागों में कामचलाऊ व्यवस्था को तत्काल बंद करने के साथ ही पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार मुक्त कार्य संस्कृति अपनाने के निर्देश दिए हैं। दफ्तरों की कार्यपद्धति और रखरखाव को बेहतर करने का मंसूबा स्पष्ट करते हुए योगी ने अपेक्षा की कि जनता वहां पहुंचे तो सुखद अनुभूति होने के साथ राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों की हाजिरी के लिए बायोमीट्रिक प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए हैं। 
मुख्यमंत्री शुक्रवार को शास्त्री भवन के सभागार में अपने विभागों से संबंधित राज्यमंत्रियों, प्रमुख सचिव और सचिवों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे। योगी ने उपस्थिति के लिए बायोमीट्रिक प्रणाली अपनाने पर जोर दिया ताकि हाजिरी लगाकर अनुपस्थित होने की प्रवृत्ति पर अंकुश लग सके। सचिवालय में प्रवेश के लिए अनावश्यक और गैर जरूरी निर्गत किए गए प्रवेश पत्रों को निरस्त करने की स्पष्ट हिदायत दी है। उन्होंने सचिवालय की सुरक्षा व्यवस्था संसद की तरह सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
दलाल और गलत प्रवृत्ति के लोगों के प्रवेश पर अंकुश लगाने और समस्याओं के त्वरित निस्तारण की अपेक्षा की। योगी ने कांशीराम आवास योजना के अधूरे आवासों को पूरा करने और प्राथमिकता के आधार आवासहीनो को आवंटित करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने को कहा। बैठक में राज्य सरकार में मंत्री स्वाती सिंह, डॉ. नीलकंठ तिवारी, सुरेश पासी, गिरीश चंद्र यादव, अतुल गर्ग, जयप्रताप निषाद तथा अर्चना पाण्डेय और मुख्य सचिव राहुल भटनागर तथा मुख्यमंत्री के विभागों से संबंधित प्रमुख सचिव एवं सचिव उपस्थित थे। 

चिकित्सकों की अनुपस्थिति पर नाराजगी 
अस्पतालों में चिकित्सकों की अनुपस्थिति पर योगी ने नाराजगी जताई। कहा कि यह स्थिति बहुत खराब है और मानवता के खिलाफ यह अपराध भी है। उनकी सरकार सड़ी-गली व्यवस्था को सुधारने के लिए कृतसंकल्प है। राजकीय अस्पतालों में शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कराने पर जोर दिया। 

गेहूं क्रय नीति सीखने छत्तीसगढ़ जाएगी टीम 
मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीद का लक्ष्य बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ से क्रय नीति सीखने पर जोर दिया। कहा कि एक टीम अध्ययन के लिए वहां जाएगी। वहां के अनुभवों को लागू करने के लिए टीम की संस्तुति पर तत्काल कार्रवाई की जाए। नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उन्होंने अफसरों को क्रय केंद्रों पर जाने के निर्देश दिए। 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद को नाकाफी बताते हुए 80 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य निर्धारित किया। गेहूं खरीद की मात्रा एवं बैंक खाते में भेजी गई धनराशि से संबंधित संदेश किसानों के मोबाइल पर भेजने की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए। 

बहुरेंगे सहकारी समितियों के दिन 
योगी ने सहकारी समितियों को पुनर्जीवित करने के निर्देश दिए हैं। कहा कि इनकी खराब स्थिति का लाभ बिचौलिए उठा रहे हैं। विभागीय प्रमुख सचिव को जवाबदेह बनाते हुए उन्होंने 16 बंद पड़े कोऑपरेटिव बैंकों का भी ब्यौरा तलब किया। 

माफिया ठेकेदारों का रजिस्ट्रेशन करें रद 
योगी ने 15 जून तक बाढ़ बचाव की तैयारी हर हाल में पूरा करने को कहा है। सूखा राहत विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए पैकेजिंग पर जोर दिया। बाढ़ राहत में लगे माफिया किस्म के ठेकेदारों का पंजीयन निरस्त कराने की खास हिदायत दी है। कहा कि कई अधिकारियों को अपराधी प्रवृत्ति के ठेकेदारों की वजह से अपनी जान गंवानी पड़ी। यह स्थिति वर्तमान सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने सभी विभागों में पंजीकृत दागी फर्मों एवं माफिया किस्म के ठेकेदारों का पंजीयन समाप्त करने को कहा है। अगर कोई दबाव बनाये तो उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराएं। 

एंटी रोमियो स्क्वाड बरते संयम 
मुख्यमंत्री ने एंटी रोमियो स्क्वाड के लिए संयम बरतने की हिदायत दी है। उन्होंने प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा को स्पष्ट हिदायत दी है कि यदि कोई युवक-युवती आपसी सहमति से कहीं बैठे हैं या कहीं जा रहे हैं तो उन पर कतई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। 

राज्य सरकार 100 दिनों का तय करेगी लक्ष्य 
थानों एवं तहसीलों में फरियादियों के लिए बैठने एवं पानी पीने की व्यवस्था अवश्य की जाए। शीघ्र राज्य सरकार 100 दिनों के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित कर जनता से मिलने और उनकी समस्याओं के निस्तारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित करेगी। 

संपत्ति बंटवारा प्रकरण जल्द निपटाएं 
योगी ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच संपत्ति एवं कार्मिकों के बंटवारे से संबंधित प्रकरणों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए ताकि सचिवालय की स्थित सुधारी जा सके। 


-- मुख्यमंत्री का फरमान--
- कार्यालयों में उपस्थिति के लिए बायोमीट्रिक व्यवस्था लागू हो। 
- कक्षों में सीसीटीवी कैमरे भी लगें।  
- जनता की समस्याओं का त्वरित एवं गुणात्मक निस्तारण।  
- प्रधानमंत्री आवास योजना का कार्य नगर विकास से लेकर आवास विकास को देने के निर्देश। 
- राजकीय अस्पतालों में चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए। 
- सस्ती दर पर उपलब्ध होने वाली जेनेरिक दवाओं की तीन हजार दुकानें खोलने की व्यवस्था हो। 
- गेहूं खरीद की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- गेहूं खरीद लक्ष्य 40 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 80 लाख मीट्रिक टन किया जाए।
- सभी सहकारी समितियों को पुनर्जीवित किया जाए। 
- सूखा एवं बाढ़ से होने वाली जनहानि के लिए संबंधित विभागों के अफसर होंगे जिम्मेदार। 
- पंजीकृत दागी फर्मों एवं माफिया किस्म के ठेकेदारों का पंजीयन समाप्त कर अच्छी संस्थाओं एवं व्यक्तियों को दें मौका। 
- अवैध खनन के लिए डीएम और एसपी सीधे होंगे जिम्मेदार। 
- अपराधियों, तस्करों और भू माफिया पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो।
- युवक और युवती आपसी सहमति से कहीं बैठे हैं या कहीं जा रहे हैं तो उन पर न हो कार्रवाई। 
- थानों और तहसीलों में फरियादियों के बैठने और पानी पीने की हो व्यवस्था। 
- प्रदेश की सभी क्षेत्रीय भाषाओं एवं संस्कृतियों के विकास के लिए कार्य किए जाएं।
- भाषा विभाग में राजनीतिक नियुक्तियों को तत्काल प्रतिबंधित किया जाए। 
- इलाहाबाद, मेरठ, आगरा, गोरखपुर तथा झांसी नगरों में भी मेट्रो चलाने के लिए तेजी से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाए। 

Wednesday, March 22, 2017

जानिए योगी सरकार में किस मंत्री को कौन सा मंत्रालय मिला


CM के पास होम, केशव को PWD और शर्मा को उच्च शिक्षा
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी के प्रस्ताव दोनों उप मुख्यमंत्रियों सहित सभी 22 मंत्री, 9 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा 13 राज्यमंत्रियों को विभाग आवंटित करने पर अपना अनुमोदन प्रदान कर दिया है।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने गृह, आवास एवं शहरी नियोजन, राजस्व, खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, अर्थ एवं संख्या, भूतत्व एवं खनिकर्म, बाढ़ नियंत्रण, कर निबंधन, कारागार, सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, गोपन, सर्तकता, नियुक्ति, कार्मिक, सूचना, निर्वाचन, संस्थागत वित्त, नियोजन, राज्य सम्पत्ति, नगर भूमि, उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय, प्रशासनिक सुधार, कार्यक्रम कार्यान्वयन, राष्ट्रीय एकीकरण, अवस्थापना, समन्वय, भाषा, वाह्य सहायतित परियोजना, अभाव, सहायता एवं पुनर्वास, लोक सेवा प्रबंधन, किराया नियंत्रण, उपभोक्ता संरक्षण, बाट माप आदि विभाग अपने पास रखे हैं।
शोहदों की शामत: UP के सभी थानों में एंटी रोमियो स्कॉट बनी
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को लोक निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, मनोरंजन कर, सार्वजनिक उद्यम विभाग का कार्यभार आवंटित किया गया है।
इसके साथ ही उप मुख्यमंत्री डाॅ0 दिनेश शर्मा को माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का कार्यभार आवंटित किया गया है।
मंत्री
(1) सूर्य प्रताप शाही को कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान
(2) सुरेश खन्ना को संसदीय कार्य, नगर विकास, शहरी समग्र विकास
(3) स्वामी प्रसाद मौर्य को श्रम एवं सेवा योजना, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन
(4) सतीश महाना को औद्योगिक विकास
(5) राजेश अग्रवाल को वित्त
(6) रीता बहुगुणा जोशी को महिला कल्याण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण, पर्यटन
(7) दारा सिंह चैहान को वन एवं पर्यावरण, जन्तु उद्यान, उद्यान
(8) धरमपाल सिंह को सिंचाई, सिंचाई (यांत्रिक)


(9) एस.पी.सिंह बघेल को पशुधन, लघु सिंचाई, मत्स्य
(10) सत्यदेव पचैरी को खादी, ग्रामोद्योग, रेशम, वस्त्रोद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, निर्यात प्रोत्साहन
(11) रमापति शास्त्री को समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण
(12) जय प्रकाश सिंह को आबकारी, मद्यनिषेध
(13) ओम प्रकाश राजभर को पिछड़ा वर्ग कल्याण, विकलांग जन विकास
(14) बृृजेश पाठक को विधि एवं न्याय, अतिरिक्त उर्जा स्रोत, राजनैतिक पेंशन
(15) लक्ष्मी नारायण चौधरी को दुग्ध विकास, धमार्थ कार्य, संस्कृति, अल्प संख्यक कल्याण
16) चेतन चैहान को खेल एवं युवा कल्याण, व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विकास
(17) श्रीकांत शर्मा को ऊर्जा
(18) राजेन्द्र प्रताप सिंह को ग्रामीण अभियंत्रण सेवा
(19) सिद्धार्थ नाथ सिंह को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
(20) मुकुट बिहरी वर्मा को सहकारिता
(21) आशुतोष टण्डन को प्राविधिक शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा
(22) नंद कुमार नंदी को स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क, पंजीयन नागरिक उड्डयन विभाग आवंटित किया गया है।
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
(1) अनुपमा जैसवाल को बेसिक शिक्षा, बाल विकास एवं पुष्टाहार, राजस्व (एमओएस), वित्त (एमओएस),
(2) सुरेश राणा को गन्ना विकास एवं चीनी मिलें, औद्योगिक विकास (एमओएस),
(3) उपेन्द्र तिवारी को जल सम्पूर्ति, भूमि विकास एवं जल संसाधन, परती भूमि विकास, वन एवं पर्यावरण, जन्तु उद्यान, उद्यान, सहकारिता (एमओएस)
(4) डाॅ0 महेन्द्र सिंह को ग्रामीण विकास, समग्र ग्राम विकास, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य (एमओएस)
(5) स्वतंत्रदेव सिंह को परिवहन, प्रोटोकला, ऊर्जा (एमओएस)
(6) भूपेन्द्र सिंह चैधरी को पंचायती राज, लोक निर्माण (एमओएस)
(7) धरम सिंह सैनी को आयुष, अभाव सहायता एवं पुनर्वास
(8) अनिल राजभर को सैनिक कल्याण, खाद्य प्रसंस्करण, होमगार्डस, प्रांतीय रक्षक दल, नागरिक सुरक्षा
(9) स्वाति सिंह को एनआरआई, बाढ़ नियंत्रण कृषि निर्यात, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार, महिला कल्याण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण (एमओएस) विभाग का कार्य आवंटित किया गया है।
राज्यमंत्री
(1) गुलाबो देवी को समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण
(2) जय प्रकाश निषाद को पशुधन एवं मत्स्य, राज्य सम्पत्ति, नगर भूमि
(3) अर्चना पाण्डेय को खनन, आबकारी, मद्यनिषेध
(4) जय कुमार सिंह जैकी को कारागार, लोक सेवा प्रबंधन
(5) अतुल गर्ग को खाद्य-रसद, नागरिक आपूर्ति, किराया नियंत्रण, उपभोक्ता संरक्षण, बाट माप, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन
(6) रणवेन्द्र प्रताप सिंह को कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान
(7) नीलकंठ तिवारी को विधि-न्याय, सूचना, खेल एवं युवा कल्याण,
(8) मोहसिन रज़ा को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, मुस्लिम वक्फ, हज,
(9) गिरीश यादव को नगर विकास, अभाव सहायता एवं पुनर्वास,
(10) बलदेव ओलाख को अल्पसंख्यक कल्याण, सिंचाई, सिंचाई (यांत्रिक),
(11) मन्नु कोरी को श्रम सेवा योजना,
(12) संदीप सिंह को बेसिक, माध्यमिक, उच्च, प्राविधिक, चिकित्सा शिक्षा
(13) सुरेश पासी को आवास, व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विभाग का कार्यभार

Sunday, March 19, 2017

योगी आदित्यनाथ: मोदी का एक और मास्टर स्ट्रोक?



देश का सबसे बड़ा राज्य यानी उत्तर प्रदेश की कमान योगी आदित्यनाथ को सौंप कर पीएम मोदी ने एक और बड़ा मास्टर स्ट्रोक खेला.

पहले सर्जिकल स्ट्राइक फिर विधान सभा चुनावों से ऐन पहले बड़े नोटों को बंद करने का फैसला लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मास्टर स्ट्रोक खेला था. उसके बाद प्रधानमंत्री देश का सबसे बड़ा राज्य यानी उत्तर प्रदेश की कमान योगी आदित्यनाथ को सौंप कर एक और बड़ा मास्टर स्ट्रोक खेला.
नोटों को बंद करने का फैसला तो सही मायने में मास्टर स्ट्रोक निकला लेकिन योगी आदित्यनाथ को यूपी का मुख्यमंत्री का दायित्व सौपना कितना कारगर साबित होगा ये तो आनेवाला समय ही बताएगा. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बीजेपी के इतने बड़े दांव के पीछे रणनीति क्या है?
लोकसभा 2019 की तैयारी !

आख़िरकार काफी मशक्कत के बाद योगी आदित्यनाथ को यूपी के मुख्यमंत्री का ताज सौंप दिया गया. केंद्र सरकार मई में अपने कार्यकाल का तीसरा साल पूरा कर लेगा. ऐसे में अगले लोकसभा चुनाव यानी 2019 को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया प्रतीत होता है. बीजेपी को एक ऐसे चेहरे की ज़रूरत थी जो बीजेपी के यूपी के 2014 लोकसभा के प्रदर्शन को बरकरार रखे.
उत्तर प्रदेश बीजेपी के लिए सबसे अहम इसलिए भी है क्योंकि यहां से सर्वाधिक 80 सांसद चुने जाते हैं और ऐसा माना जाता है कि केंद्र की सत्ता की चाभी भी इसी राज्य के पास होती है. पिछली बार बीजेपी ने यहां से अकेले दम पर 71 सीटें जीतकर रिकॉर्ड बनाया था. इसमें शायद और दावेदारों की तुलना में योगी आदित्यनाथ बिलकुल सही फिट हो रहे थे.

कट्टर हिंदुत्व की छवि
योगी की छवि कट्टर हिंदुत्व ,बीजेपी के फायर ब्रान्ड नेता और पूर्वांचल के कद्दावर नेता की थी. प्रधानमंत्री मोदी का विकास का एजेंडे के साथ हिंदुत्व का घोल शायद बीजेपी की नैय्या 2019 के लोकसभा में पार लगा देगी. पहली बार साल 1998 में सबसे युवा सांसद के तौर पर चुनकर संसद पहुंचने वाले योगी आदित्यनाथ की क्षेत्र में लोकप्रियता का आलम ये है कि चुनाव दर चुनाव इनकी जीत का अंतर बढ़ता ही चला गया. गोरखपुर, बस्ती और आज़मगढ़ मंडल की कम से कम 40 सीटों पर सीधा प्रभाव रखने वाले योगी कई बार पार्टी लाइन से अलग भी जाते रहे हैं लेकिन उनके खिलाफ कोई एक्शन पार्टी नहीं ले पाई.

यही वजह है कि लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने योगी को साधने में कभी चूक नहीं की. उपचुनावों से लेकर आम चुनावों तक योगी बीजेपी के स्टार प्रचारक रहे और पूर्वांचल के इस संन्यासी ने पश्चिम में भी खूब जलवा बिखेरा और हर सभा में भारी भीड़ खींची और शायद जिसका नतीजा देखने को भी मिला और सम्भवतः आगे मिलते भी रहेगा.
योगी को मुख्यमंत्री बनाने के बाद पब्लिक के ज़हन से जात का वहम भी दूर हो गया. ऐसा इसलिए क्योंकि साधु का कोई जात नही होती. इससे साफ हो गया कि योगी को मुख्यमंत्री बनाने से हिंदुत्व का एजेंडा बीजेपी के लिए जारी रहेगा और मोदी का 'सबका साथ-सबका विकास" को थोड़ा झटका ज़रूर लग सकता है. लेकिन झटके से ज़्यादा पार्टी के लिए वोटों का ध्रुवीकरण होगा और इसके लिए योगी को महारथ भी हासिल है.



मोदी का विकल्प ?

योगी आदित्यनाथ को देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री का ताज पहनाकर आरएसएस ने शायद जूनियर मोदी की तलाश अभी से ही शुरू कर दी है. इसकी ज़रूरत आरएसएस को इस लिए भी पड़ रही होगी क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी का कद लगातार चुनाव जीतने के बाद बढ़ता ही चला गया और कुछ समय बाद वो आरएसएस का भी न सुने इसके लिए इसे एक दूसरी पंक्ति का नेता खोजकर भी पहले से रखना होगा. थोड़े समय के लिये अगर मान भी लिया जाए कि ऐसा नहीं होगा तो भी मोदी के रिटायर होने के बाद उनके स्टेचर का एक नेता तो चाहिए ही.

आदित्यनाथ का बेबाक अंदाज़ और हिन्दुत्ववादी चेहरा उनकी सियासत की सबसे बड़ी खूबी है लेकिन मुख्यमंत्री के तौर पर ये दोनों खूबियां उनके और बीजेपी के लिये कितना फायदेमंद होगा ये तो आनेवाला समय ही बताएगा. हालांकि परिणाम चाहे जो भी हो. भगवा चेहरे की ये पहचान आज यूपी के मुख्यमंत्री के ऐतिहासिक पन्नों में एक नया दस्तावेज बन कर शामिल तो अवश्य हो चुकी है.