Friday, August 25, 2017

राइट टु प्राइवेसी: Q&A से समझें क्या है फैसला, इसका आम नागरिक पर क्या होगा असर?


राइट टु प्राइवेसी: Q&A से समझें क्या है फैसला, इसका आम नागरिक पर क्या होगा असर?
निजता के अधिकार को सुप्रीम कोर्ट ने मौलिक अधिकार करार दिया है. सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से इस बात पर मुहर लगा दी है. इस फैसले के बाद आम नागरिक को बड़ी राहत मिल गई है. सवाल-जवाब से समझें क्या है फैसला, इसका आम नागरिक पर क्या होगा असर?
नई दिल्ली: निजता के मौलिक अधिकार पर आज सुप्रीम कोर्ट ने एतिहासिक फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है. इस फैसले के बाद सरकार आपकी निजी जानकारी जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या क्रेडिट कार्ड की जानकारी को सार्वजनिक नहीं कर सकती. सुप्रीम कोर्ट निजता का मौलिक अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिया है.
सवाल: सुप्रीम कोर्ट का आज का फैसला क्या है?

जवाब: प्राइवेसी भारत के नागरिक का मौलिक यानी फंडामेंटल अधिकार है या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया है. कोर्ट ने प्राइवेसी को मौलिक अधिकार माना है. सरकार आपके आधार कार्ड, पैन कार्ड या क्रेडिट कार्ड की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकती. सुप्रीम कोर्ट ने पहले 1954 और 1962 में राइट टू प्राइवेसी के मामले में फैसला सुनाया था लेकिन तब कोर्ट ने कहा था प्राइवेसी मौलिक अधिकार नहीं है. आज सुप्रीम कोर्ट ने अपने इन्हीं दो फैसलों को पलट दिया.
सवाल: क्या है मौलिक अधिकार?
जवाब: संविधान के अनुच्छेद 21 में नागरिक के मौलिक अधिकार का जिक्र है. जिस तरह संविधान नागरिक को बराबरी का अधिकार, अभिव्यक्ति की आजादी यानी अपनी बात कहने का अधिकार देती है. उसी तरह सम्मान से जीने का अधिकार भी देती है. इन अधिकारों को छीने जाने पर देश के नागरिक हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं. हालांकि मौलिक अधिकारों की भी कुछ सीमाएं होती हैं जिनका जिक्र संविधान में भी है.
सवाल: राइट टू प्राइवेसी तक मामला पहुंचा कैसे?


जवाब: आधार को लागू तो यूपीए की मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने कराया था लेकिन पीएम मोदी की सरकार ने आधार का दायरा इतना बढ़ा दिया कि जिंदगी के लिए आधार अनिवार्य हो गया. सरकार की 92 योजनाओं औऱ इनकम टैक्स रिटर्न को आधार से जोड़ दिया. एलपीजी सब्सिडी, फूड सब्सिडी, मनरेगा की मजदूरी, स्कॉलरशिप जैसी सुविधाएं आधार से ही मिलती हैं. अगर आधार कार्ड नहीं है तो गैस सब्सिडी जैसी सुविधा नहीं मिलेगी. बैंक अकाउंट नहीं खुलेगा. इनकम टैक्स रिटर्न नहीं फाइल कर सकते. सरकार की देखादेखी कई निजी कंपनियों ने भी आधार को अनिवार्य कर दिया. जैसे-रिलायंस जिओ का कनेक्शन लेना है तो बिना आधार नंबर के मिल नहीं सकता. यहीं से राइट टू प्राइवेसी का विवाद शुरू हुआ. आधार को प्राइवेसी के खिलाफ बताकर सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई. इस केस के कई याचिकाकर्ताओं में से एक श्याम दीवान ने कोर्ट में दलील रखी कि मेरी आंख और फिंगर प्रिंट मेरी निजी संपत्ति है. सरकार की नहीं. इस पर फैसला करने से पहले सुप्रीम कोर्ट यह करना चाहता था कि आखिर किसी की निजता उसका मौलिक अधिकार है या नहीं. आज का फैसले के बाद स्पष्ट हो गया कि निजता मौलिक अधिकार है.

सवाल: राइट टू प्राइवेसी फैसले का मतलब क्या है?
जवाब: कोर्ट का आज का फैसला भारत के हर नागरिक को ये छूट देता है कि अगर टेलिकॉम कंपनियां, रेलवे या एयरलाइन कंपनियां आपसे आपकी निजी जानकारी मांगती हैं तो आप मना कर सकते हैं. फैसले के बाद अभी ये कहना मुश्किल है कि आपके इनकार कर देने से आपका काम होगा या नहीं. विवाद सिर्फ बायोमैट्रिक डिटेल्स का नहीं है. जन्म तारीख, शादी की तारीख, एड्रेस प्रूफ, बैंक अकाउंट डिटेल, ये कुछ भी हो सकता है.

सवाल: जानकारी ना देने के लिए राइट टू प्राइवेसी की आड़ ले सकते हैं?
जवाब: आज का फैसला ये व्यवस्था कतई नहीं बनाता कि आप पूरी तरह से अपनी मर्जी के मालिक हो गए. आप निजी जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं हैं. अगर आपसे कोई अपराध हो गया है तो आप मना नहीं कर सकते कि आप पुलिस या किसी जांच एजेंसी को मांगी गई जानकारी नहीं देंगे. आप ये भी नहीं कह सकते कि आपको बैंक अकाउंट भी खोलना है लेकिन आप अपनी फोटो और अन्य जानकारी नहीं देंगे.

सवाल: अगर जानकारी नहीं देंगे तो क्या होगा?
जवाब: अगर आप जानकारी देने से मना करते हैं तो आपका काम होगा या नहीं? इसका जवाब है कि अगर आपको रिलायंस जिओ का कनेक्शन चाहिए और आप आधार कार्ड देने को तैयार नहीं है तो कंपनी आपको कनेक्शन देने से मना कर सकती है. अगर आपको लोन चाहिए लेकिन आप अपने अकाउंट की डिटेल देने से मना करते हैं तो बैंक आपको लोन देने से मना कर सकता है.
सवाल: प्राइवेसी का उल्लंघन कैसे होता है?
जवाब: आप खुद अपनी निजी जानकारी ऐसे कंपनी या ऐसे व्यक्तियों को दे देते हैं जो आपकी निजी जानकारी का दुरुपयोग भी कर सकता है और किसी और के साथ शेयर भी कर सकता है. मान लीजिए आप किसी मॉल के स्टोर में गए. स्टोर में आपने शॉपिंग कार्ड बनवाया ताकि आपको रिवॉर्ड प्वाइंट मिल सके. रिवॉर्ड प्वाइंट की लालच में आप स्टोर को नाम, एड्रेस, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, मैरिज एनवर्सरी स्टोर को देते हैं. ये सारी डिटेल स्टोर से कई मार्केटिंग कंपनियों के पास जाती हैं.
सवाल: क्या सुप्रीम कोर्ट का फैसला मोदी सरकार के लिए झटका है?
जवाब: हां, सुप्रीम कोर्ट का फैसला मोदी सरकार के लिए झटका इसलिए है. ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार की दलील थी कि राइट टू प्राइवेसी मौलिक अधिकार नहीं है. मामला आधार से शुरू हुआ था जिसे जिंदगी का हिस्सा बनाने के लिए सरकार ने कई फैसले लिए हैं. हालांकि कोर्ट ने आधार पर कुछ कहा नहीं है लेकिन सरकार के लिए आधार का दायरा बढ़ाना आसान नहीं होगा. अभी तक आधार सरकार की योजनाओं और इनकम टैक्स रिटर्न के लिए जरूरी किया गया है. देश का नागरिक सरकार से कई मुद्दों पर कह सकता है कि वो जानकारी देना नहीं चाहता. कुछ मामलों को छोड़कर सरकार उसे मजबूर नहीं कर सकती.

सवाल: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी क्या सरकार निजी जानकारी ले पाएगी?
जवाब: हां, इस पर कोई रोक नहीं है. पूरी व्यवस्था सरकार और नागरिक के संबंधों पर आधारित है. सरकारी काम के लिए ज़रूरी जानकारी देने से नागरिक मना नहीं कर सकता. अगर आप संपत्ति खरीद रहे हैं और अपने बारे में ज़रूरी जानकारी न देना चाहें तो ये मान्य नहीं होगा. बेचने और खरीदने वाले का ब्यौरा कानूनी अवश्यकता है. आप निजता के अधिकार का हवाला देकर इससे मना नहीं कर सकते.
सवाल: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आधार का क्या होगा?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने आज जो फैसला सुनाया है उसमें आधार कार्ड को लेकर कुछ कहा नहीं गया है. इसलिए ये सवाल बना हुआ है कि राइट टू प्राइवेसी के तहत अगर आप बायोमैट्रिक डिटेल्स देने से मना करते हैं तो आपका आधार बनेगा या नहीं. इस मामले में पांच जजों की एक बेंच अलग से सुनवाई करेगी.
सवाल: आखिर आधार बनता कैसे है?
जवाब: आधार बनवाने के लिए नाम, एड्रेस प्रूफ के साथ तीन तरह की बायोमैट्रिक डिटेल्स ली जाती है. पहला-फिंगर प्रिंट्स. दूसरा-आई स्कैन और तीसरा फेस स्कैन.

Monday, August 21, 2017

LIVE: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला- एक साथ तीन तलाक असंवैधानिक

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मुसलमानों में प्रचलित एक बार में तीन तलाक की वैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट ने आज को अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को असंवैधानिक करार देते हुए तीन तलाक पर 6 महीने तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि इस मामले में वह संसद में कानून बनाए।

क्या कहा कोर्ट ने

एक साथ तीन तलाक असंवैधानिक। सुप्रीम कोर्ट ने तीन - दो के बहुमत से सुनाया फ़ैसला।
तीन तलाक पर 6 महीने की रोक।
मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर और जस्टिस अब्दुल नज़ीर ने कहा ये1400 साल पुरानी प्रथा और मुस्लिम धर्म का अभिन्न हिस्सा। कोर्ट नही कर सकता रद।
जस्टिस कुरियन जोसेफ़, जस्टिस आरएएफ़ नारिमन और जस्टिस यूयू ललित ने एक बार मे तीन तलाक को असंवैधानिक ठहराया।
जस्टिस नजीर और चीफ जस्टिस खेहर ने नहीं माना था असंवैधानिक।
पांच में से 3 जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताया।
6 महीने के अंदर में कानून बनाए केंद्र।
अगर 6 महीने के अंदर तीन तलाक पर कानून नहीं लाया जाता है तो तीन तलाक पर रोक जारी रहेगी।
आपको बता दें कि इस मामले की शुरुआत तब हुई थी जब उत्तराखंड के काशीपुर की शायरा बानो ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर तीन तलाक और निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। कोर्ट के फैसले से पहले तीन तलाक की पीड़िता और याचिकाकर्ता शायरा बानो ने कहा कि मुझे लगता है कि फैसला मेरे पक्ष में आएगा। समय बदल गया है और एक कानून जरूर बनाया जाएगा।

 पूर्व अटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी कहा कि यह एक बड़ा दिन है, देखते हैं कि क्या फैसला आता है।


मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन, न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर की पीठ ने एक बार में तीन तलाक की वैधानिकता पर बहस सुनी। इस पीठ की खासियत यह भी है कि इसमें पांच विभिन्न धर्मों के अनुयायी शामिल हैं। हालांकि यह बात मायने नहीं रखती क्योंकि न्यायाधीश का कोई धर्म नहीं होता। कोर्ट ने शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि वह फिलहाल एक बार में तीन तलाक पर ही विचार कर रहा है। बहुविवाह और निकाह हलाला पर बाद में विचार किया जाएगा।



-पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ सुनाएगी फैसला
-सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था

इस पर सुनवाई तो कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेकर शुरू की थी लेकिन बाद में छह अन्य याचिकाएं भी दाखिल हुईं जिसमें से पांच में तीन तलाक को रद करने की मांग है। मामले में तीन तलाक का विरोध कर रहे महिला संगठनों और पीडि़ताओं के अलावा इस पर सुनवाई का विरोध कर रहे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत ए उलेमा ए हिंद की ओर से दलीलें रखी गईं। केंद्र सरकार ने भी इसे महिलाओं के साथ भेदभाव बताते हुए रद करने की मांग की है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से पूछा था कि क्या शादी के वक्त ही मॉडल निकाहनामे में महिला को तीन तलाक न स्वीकारने का विकल्प दिया जा सकता है। बोर्ड ने कोर्ट को बताया था कि निकाह के समय न सिर्फ लड़की को तीन तलाक को न कहने के विकल्प की जानकारी दी जाएगी बल्कि मॉडल निकाहनामा में इसे एक विकल्प के तौर पर भी शामिल किया जाएगा। कोर्ट के कहने पर बोर्ड ने इस संबंध में हलफनामा भी दाखिल किया था।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें
1-तीन तलाक महिलाओं के साथ भेदभाव है। इसे खत्म किया जाए।
2-महिलाओं को तलाक लेने के लिए कोर्ट जाना पड़ता है जबकि पुरुषों को मनमाना हक दिया गया है।
3-कुरान में तीन तलाक का जिक्र नहीं है।
4-यह गैरकानूनी और असंवैधानिक है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत की दलीलें 1-तीन तलाक अवांछित है लेकिन वैध।

2-यह पर्सनल लॉ का हिस्सा है। कोर्ट इसमें दखल नहीं दे सकता।
3-1400 साल से चल रही प्रथा है। यह आस्था का विषय है, संवैधानिक नैतिकता और बराबरी का सिद्धांत इस पर लागू नहीं होगा।
4-पर्सनल लॉ में इसे मान्यता दी गई है। तलाक के बाद उस पत्नी के साथ रहना पाप है। धर्मनिरपेक्ष अदालत इस पाप के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
5-पर्सनल लॉ को मौलिक अधिकारों की कसौटी पर नहीं परखा जा सकता।

केंद्र सरकार की दलीलें
1-तीन तलाक महिलाओं को संविधान में मिले बराबरी और गरिमा से जीवन जीने के हक का हनन है।
2-यह धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं है, इसलिए इसे धार्मिक आजादी के मौलिक अधिकार में संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
3-पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित 22 मुस्लिम देश इसे खत्म कर चुके हैं।
4-धार्मिक आजादी का अधिकार बराबरी और सम्मान से जीवन जीने के अधिकार के अधीन है।
5-सुप्रीम कोर्ट मौलिक अधिकारों का संरक्षक है। कोर्ट को विशाखा की तरह फैसला देकर इसे खत्म करना चाहिए।
6-अगर कोर्ट ने हर तरह का तलाक खत्म कर दिया तो सरकार नया कानून लाएगी।

कोर्ट की टिप्पणियां
1-जो चीज ईश्वर की नजर में पाप है वह इंसान द्वारा बनाए कानून में वैध कैसे हो सकती है।
2-क्या तीन तलाक इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है।
3-क्या निकाहनामे में महिला को तीन तलाक को न कहने का हक दिया जा सकता है।
4-अगर हर तरह का तलाक खत्म कर दिया जाएगा तो पुरुषों के पास क्या विकल्प होगा।

Friday, August 18, 2017

RBI से आने वाला है 50 ₹ का नया नोट, देखें पहली झलक

नई दिल्ली (जेएनएन)। भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही 50 रुपए का नोट जारी करेगा। नए नोट पर आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे। यह नोट महात्मा गांधी वाली नई सीरीज के अंतर्गत जारी किया जाएगा। वहीं बाजार में पहले से मौजूद 50 रुपए के पुराने नोट भी मान्य होंगे। यह जानकारी आरबीआई ने एक नोटिफिकेशन के जरिए दी है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से बीते साल 8 नवंबर को लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद आरबीआई ने 500 और 2000 रुपए का नया नोट जारी किया था। नोटबंदी के बाद आरबीआई ने 500 और 1000 रुपए के नोटों  को अमान्य कर दिया था।
कैसा होगा 50 रुपए का नया नोट: 50 रुपए के नए नोट के पिछले हिस्से पर रथ के साथ हम्पी की आकृति होगी, जो कि देश की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाएगी। आपको जानकारी के लिए बता दें कि कर्नाटक स्थित हम्पी यूनेस्को की ओर से घोषित वर्ल्ड हेरिटेज साइट है। असल में यह मंदिरों और स्मारकों का शहर है। 
वहीं नोट के अगले हिस्से पर महात्मा गांधी का चित्र, इलेक्ट्रोटाइप (50) वाटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड जिसपर भारत औऱ आरबीआई लिखा होगा, बाईं ओर अशोक स्तंभ और नंबर पैनल में बढ़ते हुए क्रम के साथ अन्य फीचर भी होंगे। वहीं नोट के बाईं ओर प्रिंटिंग यानी छपाई का साल लिखा हुआ होगा। साथ ही नोट पर स्वच्छ भारत अभियान का स्लोगन, इसका लोगो और लैंग्वेज पैनल भी मौजूद होगा। 
फ़ोटो देखने कि लिए यहाँ क्लिक करें-

Tuesday, August 8, 2017

10 लाख बैंक कर्मी 22 अगस्त को करेंगे हड़ताल, निजीकरण और मर्जर का कर रहे हैं विरोध


नई दिल्ली (जेएनएन)। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) के आह्वान के बाद आगामी 22 अगस्त को करीब एक मिलियन बैंक कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल करेंगे। यूएफबीयू सभी नौ बैंक यूनियन का एक संघ है। यूएफबीयू सरकारी बैंकों के निजीकरण, विलय एवं बैंकों के समेकन और कॉर्पोरेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) के लिए सरकार के फैसले की आलोचना कर रहा है। साथ ही उसने मांग की है कि लोन को जानबूझ कर डिफॉल्ट करना क्रिमिनल अफेंस माना जाए। साथ ही एनपीए की वसूली पर संसदीय समिति की सिफारिशों को लागू किया जाए।




संघ यह भी चाहता है कि सरकार खराब ऋणों के लिए शीर्ष प्रबंधन/अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करे और बैड लोन की वसूली के लिए कुछ सख्त उपाय या प्रयास सामने रखे। साथ ही उसने यह भी मांग की है कि प्रस्तावित वित्तीय समाधान और जमा बीमा (एफआरडीआई) विधेयक को वापस लेने, बैंक बोर्ड ब्यूरो को खत्म करने के साथ ही कार्पोरेट एनपीए का बोझ बैंक ग्राहकों पर चार्ज बढ़ोतरी के जरिए नहीं डाला जाना चाहिए।
इससे अगले हफ़्ते 5 दिन बंद रहेंगे बैंक 20/08/2017 रविवार,22/08/2017 हड़ताल,25/08/2017 गणेश चतुर्थी की,26/08/2017 चौथा शनिवार,27/08/2017 रविवार की छुट्टी रहेगी। तो बेहतर रहेगा की कस्टमर अपने काम पहले ही निपटा ले।


ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने बताया कि यूएफबीयू ने यह पाया है कि तेजी से बढ़ते हुए बैड लोन की स्थिति को दुरुस्त करने के लिए तत्काल उपाय के बजाय, जो कि बैंकों को संचालन संबंधी गंभीर संकेतों की ओर आगाह कर रहे हैं, एमओयू, पीसीए, एफआरडीआई बिल, एनपीए आर्डिनेंस, आईबीसी जैसे कदम बेहतर हो सकते हैं यह पैसों की वसूली के बजाए केवल बैंकों की लागत पर बैलेंस शीट को साफ करने का काम करेंगे, जो लोगों की कड़ी कमाई की बचत का प्रतिनिधित्व करती है।