Wednesday, July 26, 2017

बिहार में सियासी भूचाल, महागठबंधन टूटा; मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस्तीफा

नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। बुधवार का दिन बिहार में महागठबंधन की सरकार के लिए अशुभ रहा। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तेजस्वी यादव के इस्तीफे को लेकर पिछले करीब 20 दिनों तक महागठबंधन के दो सहयोगी दलों जेडीयू और राष्ट्रीय जनता दल के बीच टकराव के अंजाम के रूप में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस्तीफा सामने आया है।

नीतीश कुमार ने गवर्नर को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद कहा कि मौजूदा माहौल में काम करना संभव नहीं था।नीतीश ने कहा कि अंतरात्मा की आवाज़ पर उन्होंने ये इस्तीफा दिया है। उन्होंने आगे कहा- "मैंने किसी का इस्तीफा नहीं मांगा था। तेजस्वी के मामले पर राहुल से भी बात की। हमने अच्छा काम करने का प्रयास किया।"

क्या है तेजस्वी विवाद?

तेजस्वी यादव के खिलाफ सीबीआई ने होटल के बदले जमीन केस में केस दर्ज किया है। ये मामला उस वक्त का है जब यूपीए सरकार के दौरान राजद सुप्रीमो लालू यादव रेलमंत्री थे। उनके रेलमंत्री रहते हुए होटल के टेंडर में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया और उसकी एवज में लालू और उनके परिवार को फायदा पहुंचाया गया। पटना में उन्हें इसके बदले जमीन दी गई थी।

सीबीआई की तरफ से दायर होटल के बदले जमीन केस में लालू, राबड़ी के साथ ही तेजस्वी यादव का भी नाम है। सीबीआई की ओर से केस दर्ज करने के बाद लालू यादव के पटना से लेकर भुवनेश्वर तक बारह ठिकानों पर दिनभर छापेमारी की गई। भ्रष्टाचार के इस केस में तेजस्वी का नाम आने के बाद नीतीश कुमार ने तेजस्वी को चार दिन का अल्टीमेटम देते हुए तथ्यों के साथ सामने आने को कहा था। लेकिन, तेजस्वी की तरफ से इस पर सफाई की जगह लगातार नीतीश के ऊपर राजद के नेताओं ने जमकर बयानबाजी की और हमले किए। यही बिहार में महागठबंधन सरकार की टूट की तत्काल वजह बनी।

अचानक नहीं हुआ नीतीश का इस्तीफा

नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से यह इस्तीफा अचानक नहीं हुआ है। Jagran.com ने अपनी स्पेशल रिपोर्ट में पहले ही बता दिया था कि राष्ट्रपति चुनाव के बाद नीतीश कुमार तेजस्वी मुद्दे पर बड़ा फैसला ले सकते हैं और हुआ भी वही। दरअसल, नीतीश कुमार के इस्तीफे के पीछे की कहानी राष्ट्रपति चुनाव से शुरू होती है। महागठबंधन में पहले इस बात पर सहमति थी कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक साझा उम्मीदवार घोषित किया जाएगा। महागठबंधन के द्वारा उम्मीदवार घोषित करने से पहले एनडीए ने रामनाथ कोविंद को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। नीतीश ने रामानाथ कोविंद पर महागठबंधन से अलग जाकर अपना स्टैंड लिया और ये तत्काल दोनों सहयोगी दलों में कलह की एक बड़ी वजह बनी।

तेजस्वी पर गई बिहार की सरकार

बुधवार को महागठबंधन में शामिल दोनों दल जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रीय जनता दल की ओर से विधानमंडल की बैठक बुलाई गई। राजद ने अपनी तरफ से यह साफ कर दिया कि वह किसी भी कीमत पर तेजस्वी का इस्तीफा मंजूर नहीं करेगी। उधर, जेडीयू ने विधानसमंडल दल की बैठक की और उसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सीधे गवर्नर से मिलने के लिए निकले और अपना इस्तीफा दे दिया।



लालू ने कहा- तेजस्वी नहीं देंगे इस्तीफा

राजद सुप्रीमो लालू यादव जब अपने बेटे तेजस्वी और पत्नी राबड़ी देवी के साथ मीडिया के सामने मुखातिब हुए तो उन्हें साफ कह दिया कि उन्हें तेजस्वी की इस्तीफा मंजूर नहीं है। लालू ने बकायदा इसके लिए मीडिया को कसूरवार ठहराते हुए कहा कि ये सब उनकी ही दिमागी उपज है। महागठबंधन में दरार की ख़बरों के बीच राजद सुप्रीमो ने कहा कि ये सब मीडिया की देन है और नीतीश कुमार क्या फैसला लेंगे ये बात या तो नीतीश कुमार बता सकते हैं या फिर मीडिया।



लालू ने आगे कहा कि वो चाहते हैं कि गठबंधन अपना कार्यकाल पूरा करे और नीतीश कुमार महागठबंधन दल के नेता हैं और आगे रहेंगे। जबकि, दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी स्पष्ट शब्दों में ये कहा कि जब उनसे इस्तीफा ही नहीं मांगा गया है तो वे क्यों अपना पद छोड़ें।



राजद-जेडीयू ने बुलाई विधानमंडल की अलग-अलग बैठक
बिहार के मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के इस्तीफा न देने पर अड़ी राजद ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर विधानमंडल की बैठक बुलाई । राजद ने बैठक में अपने सभी विधायकों और विधान पार्षदों को अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए कहा था। जबकि, दूसरी तरफ इसी मुद्दे पर नीतीश कुमार 1, अणे मार्ग पर जेडीयू विधानमंडल दल की बैठक की। जेडीयू ने पहले यह बैठक 27 जुलाई को रखी थी लेकिन, एक दिन पहले बुलाई गई।




मानसून सत्र में घेरने की है भाजपा की रणनीति
इससे पहले, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने मंगलवार को लगातार पांच ट्वीट कर राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश सिंह के आरोपों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा है। सुशील मोदी ने ट्वीट कर कहा कि नीतीश कुमार को महागठबंधन की ड्राइविंग सीट सौंपने पर राजद ने पहले आनाकानी की और अब वह चाहता है कि गाड़ी भ्रष्टाचार के गहरे गड्ढ़ों वाली सड़क पर उतार दी जाए।

'हाइजैक विमान के पायलट हैं नीतीश कुमार'

उन्होंने कहा कि ड्राइवर (मुख्यमंत्री) की हालत अपहृत विमान के पायलट-जैसी हो गई है। दूसरे ट्वीट में उन्होंने उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर तंज कसा है। सुशील मोदी ने आगे ट्वीटर पर लिखा है कि 26 वर्ष की उम्र में 26 बेनामी सम्पत्तियां अपने नाम कराने वाले तेजस्वी यादव के समर्थन में राजद का नया कुतर्क यह है कि सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार जारी है, इसलिए इस मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस की बात दिखावा है।



सुशील मोदी ने अपने तीसरे ट्वीट में लिखा है कि लालू बताएं कि अगर समाज में गरीबी, शोषण और सामाजिक अन्याय जारी है तो क्या उसके खिलाफ संघर्ष नहीं होना चाहिए?

Tuesday, July 25, 2017

शिक्षा मित्रों को नहीं मिली राहत, SC ने सहायक शिक्षक मानने से कर दिया इनकार

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों में सहायक शिक्षकों की भर्ती और शिक्षामित्रों के समायोजन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जहां एक ओर 172000 शिक्षा मित्रों को कोर्ट से झटका लगा है वहीं 165000 सहायक शिक्षकों को कोर्ट से राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन रद करने के हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है।
हालांकि शिक्षामित्रों को जरूरी योग्यता हासिल कर दो भर्तियों में भाग लेने का मौका दिया जाएगा इतना ही नहीं भर्ती मे उनके अनुभव को भी प्राथमिकता दी जाएगी। दूसरी ओर कोर्ट ने टीईटी के बजाए एकेडेमिक मेरिट के आधार पर भर्ती हुए सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत दे दी है। कोर्ट ने यूपी बेसिक शिक्षा विभाग के वकील राकेश मिश्रा की ये दलील स्वीकार कर ली है कि भर्ती की मेरिट एकेडेमिक योग्यता ही होगी टीईटी क्वालीफाइंग योग्यता होगी। हालांकि कोर्ट ने साफ किया है कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर टीईटी की मेरिट के आधार पर नियुक्त हो चुके 66655 सहायक अध्यापकों की भर्ती को डिस्टर्ब नहीं किया जाएगा। ये मामला 72825 सहायक शिक्षकों की भर्ती का था। कोर्ट ने कहा है कि बाकी बचे पदों को राज्य सरकार अपने नियमों के मुताबिक नया विज्ञापन निकाल कर भर सकती है।
एकेडेमिक योग्यता की मेरिट के आधार पर भर्ती हुए करीब 99000 सहायक शिक्षकों को भी इसी आधार पर राहत मिल गई है। कोर्ट ने उनकी नियुक्ति रद करने का हाईकोर्ट का एक दिसंबर 2016 का आदेश निरस्त कर दिया है और सरकार के एकेडेमिक मेरिट के नियम को सही ठहराया है। ये फैसला न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल व न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने हाईकोर्ट के विभिन्न आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निपटारा करते हुए सुनाया है। शिक्षा मित्रों का समायोजन रदसुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन रद करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के 12 सितंबर 2015 के फैसले को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि 178000 शिक्षा मित्रों का कैरियर बच्चों को मिले मुफ्त और गुणवत्ता की शिक्षा की बिनह पर नहीं हो सकता। कोर्ट ने हाईकोर्ट से सहमति जताते हुए कहा कि कानून के मुताबिक नियुक्ति के लिए 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना से न्यूनतम योग्यता जरूरी है।
न्यूनतम योग्यता के बगैर किसी नियुक्त की अनुमति नहीं दी जा सकती। ये सारी नियुक्तियां उपरोक्त तिथि के बाद हुई हैं। नियमों में छूट सीमित समय के लिए दी जा सकती है। शिक्षामित्र 23 अगस्त 2010 से पहले की श्रेणी में नहीं आते, जिनकी नियुक्ति नियमित की जा सके। कोर्ट ने कहा कि शिक्षामित्रों की नियुक्ति न सिर्फ संविदा पर थी बल्कि उनकी योग्यता भी शिक्षक के लिए निधार्रित योग्यता नहीं थी। उनका वेतनमान भी शिक्षक का नहीं था। इसलिए उन्हें शिक्षक के तौर पर नियमित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि शिक्षामित्र निर्धारित योग्यता के मुताबिक कभी शिक्षक नहीं नियुक्त हुए। उन्हें नियमों के विरुद्ध शिक्षक नहीं बनाया जा सकता। राज्य सरकार को नियमों में छूट देने का हक नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि गैप को भरने के लिए अयोग्य शिक्षकों से भले ही पढाया गया हो लेकिन अंतत: योग्य टीचरों की भर्ती होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा है कि शिक्षामित्रों को शिक्षक के तौर पर नियमित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मामले की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें भर्ती में प्राथमिकता दी जा सकती है। अगर शिक्षामित्र जरूरी योग्यता हासिल कर लेते हैं तो लगातार दो बार के भर्ती विज्ञापनों में उन्हें मौका दिया जायेगा। उन्हें आयु में छूट मिलेगी साथ ही उनके अनुभव को भी प्राथमिकता दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि जबतक उन्हे ये मौका मिलता है तबतक राज्य सरकार चाहे तो उन्हें समायोजन से पहले की शर्तो के आधार पर शिक्षामित्र के रूप में काम करने दे सकती है।

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार यादव ने कहा कि वे फैसले का सम्मान करते हैं साथ ही राज्य सरकार से शिक्षामित्रों को दो वर्ष की विभागीय टीईटी कराने की मांग करते हैं। सहायक शिक्षकों को राहतसुप्रीम कोर्ट ने पंद्रहवें और सोलहवें संशोधनों को सही ठहरा कर एकेडेमिक योग्यता के आधार पर भर्ती हुए सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत दे दी है। कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि सहायक शिक्षक भर्ती में एकेडेमिक मेरिट ही आधार होगी। टीईटी सिर्फ क्वालीफाइंग योग्यता होगी। ये सारा मामला 12वें, पंद्रहवे और सोलहवें संशोधन को लेकर था। हाईकोर्ट ने टीईटी को भर्ती की मेरिट का आधार माना था। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने ये तर्क स्वीकार कर लिया कि टीईटी जरूरी योग्यता तो है लेकिन वो एकमात्र मेरिट का जरूरी आधार नहीं है।