Friday, May 19, 2017

यूपी शिक्षक भर्तीः शिक्षामित्र, एकेडमिक और टेट मेरिट पर SC में सुनवाई पूरी, बाद में फैसला आएगा


यूपी शिक्षक भर्तीः शिक्षामित्र, एकेडमिक और टेट मेरिट पर SC में सुनवाई पूरी, बाद में फैसला आएगा

सुप्रीम कोर्ट में सहायक अध्यापक पद पर हुई नियुक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने 12वें, 15वें, 16 संशोधन, अकैडमिक, मेरिट एवं 9B टेट वेटेज पर सुनवाई करके फैसला सुरक्षित रख लिया है। आज इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं को सुनकर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट बाद में इस पर फैसला सुनाएगी।

जस्टिस आदर्श कुमार गोयल व जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने कहा कि हम कोर्ट द्वारा नियुक्त शिक्षक भर्ती को नहीं छेड़ेंगे।

 इसका मतलब है कि 72826 शिक्षक भर्ती में नियुक्त हुए टीचरों को कोई परेशानी नहीं होगी।

NCTE की तरफ से कोर्ट में कहा गया है कि वेटेज देना राज्य सरकार का अधिकार है।


इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा देने को कहा है। NCTE ने अपने पक्ष में कहा कि उसे सिर्फ न्यूनतम योग्यताओं से मतलब है।

इससे पहले बुधवार को हुई सुनवाई में इस पर फैसला सुरक्षित रख दिया गया था। शिक्षामित्रों के साथ-साथ यूपी सरकार भी इस फैसले के इंतजार में है।

टैट पास शिक्षामित्रों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता संजय त्यागी ने कहा कि यूपीटेट पास शिक्षामित्रों को छूट दी जाए।

उन्होंने कोर्ट में कहा कि ये लोग पूरी तरह से योग्य हैं और इन्होंने टेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। 72826 भर्ती में भी इनका सिलेक्शन हो गया था लेकिन सरकार ने पहले से ही इनका समायोजन कर लिया था इसलिए इनको सहायक अध्यापक के पद से नहीं हटाया जाना चाहिए। इस पर जज साहब ने कहा कि आप टैट है। हम इसको नोट कर लेते हैं।

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 शिक्षामित्रों की नियुक्तियों को अवैध ठहरा दिया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर में इस आदेश पर स्टे लगा दिया था।

क्या है मामला

 ये मामला पौने दो लाख शिक्षा मित्रों की सहायक शिक्षक बनाने का है। दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इनकी नियुक्ति को असंवैधानिक करार देकर इसे निरस्त कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ ही शिक्षा मित्र और यूपी सरकार एससी पहुंचे। 

Tuesday, May 16, 2017

पौने दो लाख शिक्षामित्रों एवं तीन लाख बी एड और टी ई टी पास के भाग्य का फैसला कल


इलाहाबाद। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में पौने दो लाख शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक बनाये जाने के मामले में अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्टसे मंगलवार को आने की संभावना है।इसकी तैयारियों को लेकर शिक्षा विभाग एवं प्रदेश सरकार लग गयी है।वहीं शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने लोग भी परेशान है कि कोर्टसे क्या और कैसा आदेश आयेगा।मामले को लेकर कोर्ट में बहस पूरी हो चुकी है। प्रदेश सरकार एवं शिक्षामित्रों ने एक से एक अधिवक्ताओं को कोर्ट में खड़ा कराके बहस करवाया जबकि बीएड और बीटीसी अभ्यर्थी भी मामले में जोरशो से लगे हुए है।इनका कहना है कि जब तक उनको न्याय नहीं मिलेगा तब तक वह न्याय की लड़ाई लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश सहित तीन जजों के बेंच के फैसलों को बदलना मुश्किल है जहां तक मानवीय दृष्टिकोण की बात है तो मामले को बढ़ाने के लिए एवं ऐसी स्थिति बनाने के लिए प्रदेश सरकार एवं बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी जिम्मेदार है। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पूर्व सीएम सहित अन्य को पार्टी बनाये जाने की तैयारी

सहायक अध्यापक पदों पर शिक्षामित्रों की नियुक्ति को लेकर शुरू होने जा रही रणनीति
बड़ी संख्या में बीएड, बीटीसी व शिक्षामित्र पहुंच रहे दिल्ली

 बीएड-बीटीसी मोर्चा  ने प्रदेश के पौने दो लाख शिक्षामित्रों को नियम-कानून ताक पर रखकर परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक बनाये जाने के हाईकोर्टइलाहाबाद के मामले को लेकर अब नयी रणनीति बना रहा है।वह अब प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविन्द चौधरी, प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद शासन को शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक बनाये जाने के मामले में कोर्ट में पार्टीबनाने जा रहा है। मोर् चेके अभ्यर्थियों का कहना है जिस तरह से हरियाणा में वहां के पूर्वमुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने भर्ती के दौरान व्यापक स्तर पर गड़बड़ी किया था ठीक उसी तर्ज पर शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक बनाये जाने के मामले में होना चाहिए कि किस तरह से उनको सहायक अध्यापक बनाया गया और उनको बचाने के लिए पब्लिक के दिये गये टैक्स के पैसे को पानी की तरह अधिवक्ताओं और शिक्षा विभाग के अफसरों पर बहाया गया है। इस मामले में इन सभी के खिलाफ मामला दर्ज करके कार्रवाई शुरू की जाये एवं पब्लिक के टैक्स के खर्च पैसे की वसूली हो।
शिक्षा विभाग के अफसरों की भी फूल रही है सांस

इलाहाबाद। बेसिक शिक्षा परिषद के अफसरों एंव पूर्ववर्तीसपा सरकार में तैनात शिक्षा विभाग के अफसरों की भी सांस फू ल रही है कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पौने दो लाख शिक्षामित्रों के मामले में क्या फैसला आने जा रहा है।यह अफसर भी पूरी तरह से निराश हो गये है कि उनके पक्ष में फैसला आने की संभावना नही है।वह लोग मनवीय दृष्टिकोण को अब अपना अंतिम हथियार बना रहे है जबकि नियम विरुद्ध शिक्षक भर्ती को लेकर कोईभी शिक्षा विभाग का अफसर अब आगे नहीं आ रहा है। शिक्षा विभाग के अफसरों को भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट मानवीय आधार पर शिक्षामित्रों की संख्या को देखते हुए उनको मानदेय पर रख सकता है लेकिन वह हाईकोर्ट इलाहाबाद के चीफ जस्टिस और फुल बेंच द्वारा दिये गये फैसले को पलट नहीं सकता है। वह पूरी तरह से परेशान है।

Saturday, May 13, 2017

फिर ये EVM-बाजी...!?!





फिर ये EVM-बाजी...!?!

मतलब सवालों से घिर जाओ तो फिर एक पुराना जिन्न निकाल लो...

भाईसाहब 'सौरभ भारद्वाज' जी... आप जो आज दिल्ली विधानसभा में एक खिलौना दिखा के देश की एक सम्मानित संस्था 'चुनाव आयोग' का मजाक उड़ा रहे थे... वो एक बहुत ही गिरी हुई हरकत है... और वैसे न जाने कितने खिलौने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान हर बच्चा... मजे-मजे में बनाया करता है... पर उसे EVM नहीं कहते मित्र...!!

मैं भी थोड़ा इंजीनियरिंग का ज्ञान रखता हूँ... Electronics & Communications (EC) में BTech किया है... और Semiconductor Materials में MTech सन 2006 में किया... IIT Kanpur एक संस्थान है वहां से...

उसके बाद एक सॉफ्टवेयर कम्पनी है TCS... उसमें जॉब की... वो भी उनकी तरफ से CISCO के प्रोजेक्ट में... जो कि विश्व की नं. 1 नेटवर्किंग कम्पनी है।

2010 तक उत्तर भारत के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज, HBTI Kanpur, के EC department में पढ़ाता रहा हूँ।

तो भाईसाहब ऐसा है... आपकी जानकारी के लिए कुछ points दे रहा हूँ:


1) EVM में इस्तेमाल होने वाली chip कोई आपके खिलौने की तरह Programmable नहीं होती है... That's only Read Only Memory (ROM)... जिसमें स्टोर किया डाटा... 10 साल या उससे भी ज्यादा समय तक सुरक्षित रह सकता है।


2) आप जो कोड की बात कर रहे थे वो भी किसी टेक्निकल व्यक्ति के सामने मत करिएगा वरना वो हँसेगा आपके ऊपर... हाँ, ताली के लिए व्हिप जारी करके जरूर वाहवाही बटोरी जा सकती है।


3) चुनाव के दौरान 'नाम वापसी' के दिन तक किसी को भी ये पता नहीं होता है कि किस विधान सभा में कितने प्रत्याशी होंगे, उनका EVM में नाम किस क्रम में होगा... तो वो EVM क्या खाक सेट कराएँगे।


4) किस बूथ पर कौन सी EVM मशीन लगेगी इसका निर्धारण भी एक 'रैंडम अरे प्रोग्राम' के जरिए तय होता है। तो वहां भी ये पता नहीं रहता कि कौन सी EVM कहाँ गई... फिर हर जगह पार्टियों का क्रम बदल जाता है... इसलिए Uniform Coding असम्भव है।


हम समझ सकते हैं कि आप भी ये बारीकियाँ समझते होंगे... पर आप ये सब नाटक... 'आला-कमान' के निर्देशों पर ही कर रहे होंगे... ताकि जनता, एजेंसीज व मीडिया का ध्यान भटकाया जा सके... और AAP के कुछ शीर्ष नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के मुद्दे से बहस को शिफ्ट किया जा सके।

और अल्का लाम्बा जी ये क्या तर्क हुआ कि 2015 में हम 70 में से 67 सीटें जब जीते थे तब विपक्षी इसलिए EVM हैक नहीं किए... क्योंकि तब पूरी दिल्ली में हल्ला था कि हमीं जीतने वाले हैं...

अरे ऐसे तो पार्टी पंजाब चुनाव के पहले भी खूब हल्ला काटे थी कि हमीं जीतने वाले हैं... और वो भी 100 के ऊपर सीट आएँगी... दिल्ली का भी रिकॉर्ड टूटेगा... और भी न जाने क्या-क्या

मेरा अब भी PAC से निवेदन है कि आप जितना सवालों से भागेंगे... फिजूल के नकारात्मक बहाने बनाएंगे... उतना पार्टी को नुकसान होगा।

बड़े दिल से स्वीकार करिए कि, हाँ पार्टी से कुछ राजनैतिक निर्णय लेने में गलतियाँ हुईं हैं... जिसका खामियाजा हमें पंजाब, गोवा व दिल्ली के हाल के चुनावों में भुगतना पड़ा। आगे हम इन गलतियों से सीख लेकर उचित कदम उठाएंगे।

यदि हमारा कोई भी सदस्य, भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त रहा है तो निष्पक्षता के साथ पूरी जाँच प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

और भारतवर्ष की स्थापित संस्थाओं पर ऐसे कुतर्की, भ्रामक व ओछे हमले नहीं करेंगे।


||||जय हिन्द...जय भारत||

-ओमेन्द्र 'भारत'


इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि WWW.Zeenewsportal.blogspot.comया  ADMIN उनसे सहमत हो.






इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.
ओमेन्द्र 'भारत' की फेसबुक वाल से साभार


Tuesday, May 9, 2017

बेरोजगारों की बल्ले-बल्ले! PM मोदी पूरा करेंगे 1 करोड़ नौकरी देने का चुनावी वादा


मोदी राज में बेरोजगार युवाओं के सपने अब पूरे होने वाले हैं. मोदी सरकार तीन साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही है, जिसे देखते हुए अच्छे दिन के अपने वादों को पूरा करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोर है. पीएम मोदी ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया है कि कैबिनेट को भेजे जाने वाले सभी प्रस्तावों में यह जानकारी जरूर दी जाए कि उन प्रस्तावों पर अमल करने से रोजगार के कितने मौके बनेंगे. 
रोजगार सृजन को लेकर प्रधानमंत्री सक्रिय
दरअसल 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोदी ने युवाओं को 1 करोड़ रोजगार के अवसर देने का वादा किया था. हालांकि, बीते तीन सालों में रोजगार देने के मामले में मोदी सरकार का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है. वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बिजनेस अखबार को बताया कि जिस भी प्रस्ताव के साथ कुछ खर्च जुड़ा होगा, उससे देश में रोजगार निर्माण होना ही चाहिए और ऐसे प्रस्ताव के साथ जॉब्स एस्टिमेट दिया जाना चाहिए. सीतारमण ने बताया, 'जब भी कोई प्रस्ताव चर्चा के लिए आता है तो प्रधानमंत्री कैबिनेट बैठक में पूछते हैं कि रोजगार के कितने मौके बनेंगे?' 




बेरोजगारी दूर करने का ये है ऐक्शन प्लान
आर्थिक वृद्धि के साथ रोजगार के मौके बनने की रफ्तार बढ़ाने के लिए नीति आयोग ने तीन साल का एक ऐक्शन प्लान पेश किया है, जिसमें विभिन्न सेक्टरों में रोजगार सृजित करने की बात की गई है. सीआईआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2012 से 2016 के बीच भारत में रोजगार के 1.46 करोड़ मौके बने थे. यानी हर साल 36.5 लाख अवसर. कामकाजी उम्र वाले लोगों की संख्या में 8.41 करोड़ का इजाफा हुआ, लेकिन वास्तिक श्रम बल में बढ़ोतरी केवल 2.01 करोड़ रही। कामकाजी उम्र वाली आबादी का 24 प्रतिशत हिस्सा श्रम बल में जुड़ा, जबकि 76 प्रतिशत हिस्सा इससे बाहर रहा.

हर महीने 15 लाख लोगों की जॉब मार्केट में एंट्री
क्रिसिल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 लाख से ज्यादा लोग हर महीने देश के जॉब मार्केट में रोजगार तलाशने आते हैं. वहीं, मानव श्रम पर निर्भरता घटाने वाले ऑटोमेशन की वजह से स्थिति गंभीर होती जा रही है. सरकार ज्यादा रोजगार पैदा करना चाहती है ताकि आमदनी बढ़े और लाखों लोग गरीबी के जाल से बाहर निकलें. सरकार अपनी मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी की भी समीक्षा भी कर रही है ताकि उसे रोजगार निर्माण के उद्देश्य के मुताबिक बदला जा सके. इकनॉमिक सर्वे 2017 में कहा गया है कि आबादी में युवाओं की अधिक संख्या से ग्रोथ में होने वाली बढ़ोतरी अगले पांच वर्षों में उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी क्योंकि तब तक कामकाजी उम्र वाले लोगों की संख्या में ठहराव आ चुका होगा. ऐसे में कौशल और उद्यमिता को बढ़ावा देना जरूरी हो गया है.


Monday, May 8, 2017

कल सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई, आने वाला है बड़ा फैसला!

शिक्षामित्रों के भविष्य पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, आने वाला है बड़ा फैसला!

शिक्षामित्रों के भविष्य पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, आने वाला है बड़ा फैसला!
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में पौने दो लाख शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के रूप में समायोजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज यानी 8 मई को सुनवाई होगी। यह सुनवाई दोपहर 2 बजे से शुरू होगी। यह सुनवाई सोमवार और मंगलवार दो दिन लगातार की जाएगी। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अपना बड़ा फैसला सुना सकता है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे संकेत दिए हैं कि शिक्षामित्रों की नौकरी खत्‍म कर नए सिरे से भर्ती की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नई भर्ती होने तक मौजूदा शैक्षणिक सत्र तक शिक्षामित्रों को कार्य करने दिया जाएगा और जैसे ही नई भर्ती प्रक्रिया संपन्न होगी उन्हें उससे बदल दिया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो उत्तर प्रदेश में शिक्षण कार्य कर रहे 1 लाख 75 हजार शिक्षामित्रों की नौकरी खतरे में पड़नी तय है। आपको बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 शिक्षामित्रों की नियुक्तियों को अवैध ठहरा दिया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर में इस आदेश को स्टे कर दिया था। यह भी पढ़ें: शिक्षामित्रों की नियुक्तियां असंवैधानिक
इससे पहले सुनवाई के दौरान जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की पीठ ने कहा कि शिक्षामित्रों की नियुक्तियां असंवैधानिक हैं क्योंकि आपने बाजार में मौजूद प्रतिभा को मौका नहीं दिया और उन्हें अनुबंध पर भर्ती करने के बाद उनसे कहा कि आप अनिवार्य शिक्षा हासिल कर लो। कोर्ट ने कहा कि 6 माह के भीतर नई भर्ती कीजिए। तब तक शिक्षामित्रों को शिक्षण कार्य करने दीजिए। कोर्ट ने कहा कि शिक्षामित्रों की इस भर्ती में बैठने का पूरा अधिकार होगा, उनके लिए उम्र सीमा का कोई बंधन नहीं होगा, क्योंकि वह पहले से पढ़ा रहे हैं। वहीं यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाए जाने का बचाव किया। सरकार ने कहा कि दूर-दराज के इलाकों में रह रहे बच्चों को शिक्षित करने के उद्देश्य से शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के तौर पर नियुक्त किया गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षामित्रों की नियुक्तियां असंवैधानिक हैं।

 1 लाख 35 हजार शिक्षामित्रों का हो चुका है समायोजन


आपको बता दें कि यूपी सरकार ने करीब 1 लाख 35 हजार शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षकों के तौर पर समायोजन किया है, जबकि करीब 35 हजार सहायक शिक्षकों की नियुक्ति अभी होनी है, लेकिन फिलहाल वह रुकी हुई है। इनकी नियुक्ति बिना टीईटी परीक्षा के ग्राम पंचायत स्तर पर मेरिट के आधार पर की गई थी। 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार ने इनके दो वर्षीय प्रशिक्षण की अनुमति नेशनल काउंसिल फार टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) से ली। इसी अनुमति के आधार पर इन्हें दूरस्थ शिक्षा के अंतर्गत दो वर्ष का बीटीसी प्रशिक्षण दिया गया। यह भी पढ़ें: हाईकोर्ट ने नियुक्तियां कर दी थीं रद्द
2012 में सत्ता में आई सपा सरकार ने इन्हें सहायक अध्यापक पद पर समायोजित करने का निर्णय लिया। पहले चरण में जून 2014 में 58,800 शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन हो गया। दूसरे चरण में जून में 2015 में 73,000 शिक्षामित्र सहायक अध्यापक बना दिए गए। तीसरे चरण का समायोजन होने से पहले ही हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 में शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्त करने के खिलाफ फैसला दिया था और सभी नियुक्तियां रद्द कर दी थीं। फिलहाल इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है।

Tuesday, May 2, 2017

नौकरी पर संकटः SC का यूपी के 1.75 लाख शिक्षामित्रों को हटाने का संकेत

नौकरी पर संकटः SC का यूपी के 1.75 लाख शिक्षामित्रों को हटाने का संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि यूपी में शिक्षण कार्य कर रहे पौने दो लाख शिक्षामित्रों को हटाकर उन्हें नए सिरे से भर्ती करने का आदेश दिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि नई भर्ती होने तक मौजूदा शैक्षणिक सत्र तक शिक्षामित्रों को कार्य करने दिया जाएगा और जैसे ही नई भर्ती संपन्न होगी उन्हें उससे बदल दिया जाएगा। 
जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की पीठ ने मंगलवार को ये टिप्पणियां तब की जब यूपी के एएजी अजय कुमार मिश्रा और नलिन कोहली ने कहा कि यदि सर्वोच्च अदालत हाईकोर्ट के फैसले को कोर्ट सही मान रही है तो हमारे पास कहने के लिए कुछ नहीं है। लेकिन हम 22 सालों से काम कर रहे पौने दो लाख लोगों का क्या yकरेंगे। 
कोर्ट ने कहा कि इसका समाधान हम बताएंगे। 
पीठ ने कहा कि आप छह माह के अंदर नई भर्ती कीजिए। इस भर्ती को दिसंबर तक पूरा कीजिए। ऑनलाइन आवदेन सिस्टम से यह संभव है। इसके बाद अगले वर्ष मार्च तक नियुक्तियां कीजिए। तब तक शिक्षामित्रों को अध्यापन करने दीजिए। उन्हें इस भर्ती में बैठने का पूरा अधिकार होगा, उनके लिए उम्रसीमा का बंधन नहीं होगा, क्योंकि वह पहले से पढ़ा रहे हैं। जहां तक उन्हें दी जाने वाली वरिष्ठता का सवाल है तो यूपी सरकार नियम बनाकर उसे तय कर सकती है। इसमें कोई समस्या नहीं है। 
नियुक्तियां असंवैधानिक
कोर्ट ने कहा कि शिक्षामित्रों की नियुक्तियां संवैधानिक के खिलाफ हैं क्योंकि आपने बाजार में मौजूद प्रतिभा को मौका नहीं दिया और उन्हें अनुबंध पर भर्ती करने के बाद उनसे कहा कि आप अनिवार्य शिक्षा हासिल कर लो। पीठ ने कहा कि यह बैकडोर एंट्री है जिसे उमादेवी केस (2006) में संविधान पीठ अवैध ठहरा चुकी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 शिक्षामित्रों की नियुक्तियों को अवैध ठहरा दिया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर में इस आदेश को स्टे कर दिया था। 
दूरदराज शिक्षा देने के लिए की थी भर्ती
यूपी सरकार ने कहा कि 1999 में शिक्षामित्रों की भर्ती प्रदेश के दूरदराज केक्षेत्रों में बालकों को बेसिक शिक्षा देने के लिए की गई थी। यह एक कल्याणकारी कदम था जिसके पीछे कोई गलत मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि 22 साल से चल रही यूपी सरकार की इस नीति को चुनौती नहीं दी है। जिन्होंने चुनौती दी है उनकी संख्या लगभग 200 है और उन्हें सरकार नौकरी में लेने को तैयार है। 
अच्छी मंशा आंखों का धोखा है
कोर्ट ने कहा हम मंशा पर सवाल नहीं उठा रहे हैं हम यह पूछ रहे हैं कि आपने शिक्षामित्रों को योग्यता शिक्षा हासिल (बीएड,बीटीसी, दूरस्थ बीटीसी और टीईटी) करने के लिए किस नियम के तहत अनुमति दी। क्या आपने इसके लिए कोई विज्ञापन निकाला था क्या कोई चयन प्रक्रिया तय की थी। आपकी कल्याणकारी मंशा कुछ नहीं, आंखों का धोखा मात्र है, आपने नियमों के विरुद्ध भर्ती की है। जस्टिस ललित ने पूछा आप इस नतीजे पर किस आधार पर पहुंचे कि प्रदेश में पौने दो लाख शिक्षामित्रों की जरूरत है और आपने मार्केट में मौजूद प्रतिभा को महरूम कैसे किया। क्या इसे निष्पक्ष प्रतियोगिता कहा जा सकता है। आप कह रहे हैं इसे किसी ने चुनौती नहीं दी। जब तक ये अनुबंध था किसी को समस्या नहीं थी लेकिन जब आप नियमित करने लगे तक समस्या हुई। बिना विज्ञापन आप नियमित कैसे कर सकते हैं। 
कोर्ट मामले को आज की समाप्त करना चाहता था लेकिन कुछ शिक्षामित्रों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने वह कुछ बहस करेंगे। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को बचकाना बताया और कहा कि उन्होंने यह नहीं देखा कि शिक्षामित्र रखने को उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा देना था। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने फैसला देते समय एक भी शिक्षामित्र को नोटिस नहीं दिया था। कोर्ट का समय पूरा होने के कारण बहस पूरी नहीं हो सकी इसलिए कोर्ट ने मामला कल तक के लिए स्थगित कर दिया।

भारतीय सेना ने दिया पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब, उड़ायीं पाक की तीन चौकियां

नई दिल्ली: पाकिस्तान ने भारत के दो जवानों के शव के साथ जो बर्बरता की थी, उसका भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए पुंछ सेक्टर में पाकिस्तान की तीन चौकियों पर हमला करके उन्हें पूरी तरह तबाह कर डाला.


मीडिया खबरों के मुताबिक भारतीय सेना ने एलओसी के उस पार मौजूद पाक सेना की उन चौकियों को ध्वस्त कर दिया है जिनसे बॉर्डर एक्शन टीम के सदस्यों की घुसपैठ के लिए उनको कवर फायर दिया गया था.



भारतीय सेना ने जमकर फायरिंग कर पुंछ सेक्टर में पाकिस्तानी सेना की तीन पोस्ट को तबाह कर डाला है. भारतीय सेना ने पाकिस्तान के किरपान और पिंपल पोस्ट पर निशाना साधा.



सूत्रों को मुताबिक पाक की बॉर्डर एक्शन टीम की 647 मुजाहिद बटालियन ने एलओसी पर हुए हमले को अंजाम दिया था. बटालियन के सदस्यों की घुसपैठ के लिए पाक आर्मी की ओर से किरपान और पिंपल पोस्ट से कवर फायरिंग की गई थी. अब जवाब में भारतीय सेना ने भी पाक की उन चौकियों को ध्वस्त कर दिया है जिनसे ये कवर फायरिंग हुई थी.


गौरतलब है कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अपना घिनौना चेहरा दिखाते हुए भारतीय जवानों के शव क्षत़-विक्षत कर दिए.पाकिस्तानी सेना ने सोमवार (1 मई) को सुबह सीजफायर का उल्लंघन करते हुए पुंछ में मोर्टार और रॉकेट दागे.


इस गोलीबारी में भारतीय सेना के दो जवान शहीद हो गए. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम ने भारतीय सीमा में घुसकर दो जवानों के शवों के साथ बर्बरता की. दूसरी तरफ भारत ने कहा कि पाकिस्तान की इस हरकत का वह माकूल जवाब देगा.

अधिकारियों ने बताया कि विशेष बलों के दल बॉर्डर एक्शन टीम (बीएटी) ने पाकिस्तानी सैनिकों की भारी गोलाबारी के बीच पुंछ जिले के कृष्ण घाटी सेक्टर में इस हमले को अंजाम दिया.

सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि सेना के एक जवान और बीएसएफ के एक हेड कांस्टेबल के शवों को क्षत-विक्षत किया गया, लेकिन सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनके सिर धड़ से अलग किए गए हैं.


मृतकों की पहचान बीएसएफ की 200वीं बटालियन के हेड कांस्टेबल प्रेम सागर और सेना की 22 सिख रेजीमेंट के नायब सुबेदार परमजीत सिंह के तौर हुई है. हमले में जख्मी हुए बीएसएफ बटालियन के कांस्टेबल राजिंद्र सिंह खतरे से बाहर हैं.

अधिकारियों ने बताया कि बीएटी की टीम ने भारतीय सैनिकों के गश्ती दल को निशाना बनाते हुए जाल बिछाया था. इस बीच पाकिस्तानी सेना ने भारत की दो अग्रिम रक्षा चौकियों (एफडीएल) को रॉकेट और मोर्टार बम हमलों में उलझाए रखा. सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘पाकिस्तान सेना का यह पूर्व नियोजित अभियान था. उन्होंने बीएटी को भारतीय क्षेत्र में 250 मीटर तक अंदर तक भेजा और हमला करने के लिए उसने लंबे वक्त तक घात लगाई.’

Monday, May 1, 2017

J&K: पाकिस्तान की सेना ने की शहीद जवानों के शवों से बर्बरता



पाकिस्तान ने एक बार फिर सीजफायर का उल्लंघन किया है। इस हमले शहीद जवानों के शव से पाकिस्तानी सैनिकों ने बर्बरता की।



 संवाददाता, पुंछ। एक सप्ताह की शांति के बाद पाक सेना ने पुंछ जिले की मेंढर तहसील के कृष्णा घाटी सेक्टर में संघर्ष विराम का उल्लंघन किया जिसमें एक सेना का जवान व एक सीमा सुरक्षा बल का जवान शहीद हो गए। जबकि एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। पाकिस्तानी सैनिकों ने शहीद जवानों के शवों से बर्बरता की। इस मामले पर सेना ने कहा कि पाकिस्तान को इसका माकूल जवाब दिया जाएगा।

जानकारी के अनुसार सोमवार की सुबह पाक सेना ने भारतीय सेना की चौकियों को निशाना बनाकर गोलाबारी शुरू कर दी इस गोलाबारी में भारतीय सेना का एक जवान व सीमा सुरक्षा बल का एक जवान शहीद हो गया जबकि सीमा सुरक्षा बल का अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गया जिसका उपचार सैन्य अस्पताल में किया जा रहा है। वहीं भारतीय सेना द्वारा भी पाक सेना को मुंह तोड़ जवाब दिया जा रहा है।



एक सप्ताह के बाद पाक सेना ने तोड़ा संघर्ष विराम
एक सप्ताह पहले पाक सेना ने राजौरी जिले के नौशहरा सेक्टर में जमकर गोलाबारी की थी इस कार्रवाई में सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का काफी नुकसान हुआ था। भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में पाक सेना के आठ जवान भी मारे गए थे। इसके बाद पाक सेना ने सीमा पर शांति को कायम कर लिया था, लेकिन अब एक बार फिर से पाक सेना ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है।