Tuesday, November 29, 2016

जम्मू: सेना शिविर पर हमला, 'सात सैनिकों की मौत'


जम्मू के नगरोटा में चरमपंथियों ने मंगलवार सुबह सेना के एक शिविर पर हमला किया और उसके बाद चले ऑपरेशन में भारतीय सेना के दो अफ़सरों और पांच अन्य सैनिकों की मौत हो गई है.
भारतीय सेना के प्रवक्ता कर्नल मनीष मेहता ने कहा है, "सैन्य शिविर में कोंबिंग ऑपरेशन जारी है जो केवल रात के समय रुका है. पूरे इलाक़े की घेराबंदी की गई है. दो अफ़सर और पांज सैनिक मारे गए हैं. हथियारबंद चरमपंथियों ने भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े पांच बजे 166 मिडियम आर्टिलरी रेजीमेंट पर हमला कर किया था. नुक़सान का अभी जायज़ा लिया जा रहा है.''
नगरोटा में ही भारतीय सेना के 16 कॉर का मुख्यालय है. यह सीमाओं की सुरक्षा और चरमपंथ विरोधी अभियानों की योजना बनाता है.


समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ सांबा सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास घुसपैठ का प्रयास कर रहे चरमपंथियों और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों के बीच भी गोलीबारी की ख़बर है.

सांबा सेक्टर में बीएसएफ़ ने तीन चरमपंथियों को मारने का दावा किया है. बीएसएफ़ के एक अधिकारी ने कहा, ''हमारे जवानों ने मंगलवार सुबह तीन घुसपैठियों को मार दिया.''
जम्मू को कश्मीर घाटी से जोड़ने वाले हाइवे पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और यातायात को रोक दिया गया है. जम्मू ज़िले के आयुक्त सिमरनदीप सिंह ने नगरोटा के स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए हैं.
भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर के उड़ी में भारतीय सेना के एक शिविर पर 18 सितंबर को हुए चरमपंथी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान की सीमा पर तनाव बना हुआ है.
भारत ने 29 सिंतबर को दावा किया था कि भारतीय सैनिकों ने 28 सितंबर की रात पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में जाकर चरमपंथी शिविरों पर सर्जिकल स्ट्राइक की है और इसमें भारी नुक़सान हुआ है.



पाकिस्तान ने इस तरह के किसी भी तरह के सर्जिकल स्ट्राइक से इनकार किया था.

Sunday, November 27, 2016

नोट बंदी की खबरों के बीच दब गयी ममता बनर्जी के पशिम बंगाल की ये बड़ी खबर



नोट बंदी की खबरों के बीच दब गयी ममता  बनर्जी के पशिम बंगाल की ये बड़ी खबर 

जहाँ हुगली जिले  के  मोगरा  बाई पास  जो  फ्लाईओवर  बन  रहा  था  वो  शनिवार रात्रि    गिर  गया 
जिसकी कुछ फोटो हमारे पाठक ने भेजी है ,
फोटो में देखे भ्रस्टाचार की हद ममता दीदी के राज में 

















पीएम मोदी ने 26वीं बार की देशवासियों से 'मन की बात', क्या कहा- पढ़ें हू-ब-हू

मेरे प्यारे देशवासियों, 
नमस्कार!

 
पिछले महीने हम सब दिवाली का आनंद ले रहे थे। हर वर्ष की तरह इस बार दिवाली के मौके पर, मैं फिर एक बार जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिये, चीन की सीमा पर, सरहद पर गया था। ITBP के जवान, सेना के जवान- उन सबके साथ हिमालय की ऊंचाइयों में दिवाली मनाई। मैं हर बार जाता हूँ, लेकिन इस दिवाली का अनुभव कुछ और था। देश के सवा-सौ करोड़ देशवासियों ने, जिस अनूठे अंदाज़ में, यह दिवाली सेना के जवानों को समर्पित की, सुरक्षा बलों को समर्पित की, इसका असर वहां हर जवानों के चेहरे पर अभिव्यक्त होता था। वो भावनाओं से भरे-भरे दिखते थे और इतना ही नहीं, देशवासियों ने जो शुभकामनायें-सन्देश भेजे, अपनी ख़ुशियों में देश के सुरक्षा बलों को शामिल किया, एक अद्भुत response था। और लोगों ने सिर्फ़ सन्देश भेजे, ऐसा नहीं, मन से जुड़ गए थे; किसी ने कविता लिखी, किसी ने चित्र बनाए, किसी ने कार्टून बनाए, किसी ने वीडियो बनाए, यानि न जाने हर घर सेनानियों की जैसे चौकी बन गया था। और जब भी ये चिट्ठियाँ मैं देखता था, तो मुझे भी बड़ा आश्चर्य हो रहा था कि कितनी कल्पकता है, कितनी भावनायें भरी हैं और उसी में से MyGov को विचार आया कि कुछ चुनिन्दा चीज़ें निकाल करके उसकी एक Coffee Table Book बनाई जाए। काम चल रहा है, आप सबके योगदान से, देश के सेना के जवानों की भावनाओं को आप सबकी कल्पकता से, देश के सुरक्षा बलों के प्रति आपका जो भाव-विश्व है, वह इस ग्रन्थ में संकलित होगा।
सेना के एक जवान ने मुझे लिखा - प्रधानमंत्री जी, हम सैनिकों के लिये होली, दिवाली हर त्योहार सरहद पर ही होता है, हर वक्त देश की हिफाज़त में डूबे रहते हैं। हाँ, फिर भी त्योहारों के समय घर की याद आ ही जाती है। लेकिन सच कहूँ, इस बार ऐसा नहीं लगा। ऐसा कतई feel नहीं हुआ कि त्योहार है और मैं घर नहीं हूँ। ऐसा महसूस हुआ मानो हम भी, सवा-सौ करोड़ भारतवासियों के साथ दिवाली मना रहे हैं।
 
मेरे प्यारे देशवासियों, जो अहसास इस दिवाली, इस माहौल में जो अनुभूति, हमारे देश के सुरक्षा बलों के बीच, जवानों के बीच जगा है, क्या ये सिर्फ़ कुछ मौकों पर ही सीमित रहना चाहिये? मेरी आपसे appeal है कि हम, एक समाज के रूप में, राष्ट्र के रूप में, अपना स्वभाव बनाएँ, हमारी प्रकृति बनाएँ। कोई भी उत्सव हो, त्योहार हो, खुशी का माहौल हो, हमारे देश के सेना के जवानों को हम किसी-न- किसी रूप में ज़रूर याद करें। जब सारा राष्ट्र सेना के साथ खड़ा होता है, तो सेना की ताक़त 125 करोड़ गुना बढ़ जाती है।
 
कुछ समय पहले मुझे जम्मू-कश्मीर से, वहाँ के गाँव के सारे प्रधान मिलने आये थे। Jammu-Kashmir Panchayat Conference के ये लोग थे। कश्मीर घाटी से अलग-अलग गाँवों से आए थे। क़रीब 40-50 प्रधान थे। काफ़ी देर तक उनसे मुझे बातें करने का अवसर मिला। वे अपने गाँव के विकास की कुछ बातें लेकर के आए थे, कुछ माँगें लेकर के आए थे, लेकिन जब बात का दौर चल पड़ा, तो स्वाभाविक था, घाटी के हालात, क़ानून व्यवस्था, बच्चों का भविष्य, ये सारी बातें निकलना बड़ा स्वाभाविक था। और इतने प्यार से, इतने खुलेपन से, गाँव के इन प्रधानों ने बातें की, हर चीज़ मेरे दिल को छूने वाली थी। बातों-बातों में, कश्मीर में जो स्कूलें जलाई जाती थीं, उसकी चर्चा भी हुई और मैंने देखा कि जितना दुःख हम देशवासियों को होता है, इन प्रधानों को भी इतनी ही पीड़ा थी और वो भी मानते थे कि स्कूल नहीं, बच्चों का भविष्य जलाया गया है। मैंने उनसे आग्रह किया था कि आप जाकर के इन बच्चों के भविष्य पर अपना ध्यान केन्द्रित करें। आज मुझे ख़ुशी हो रही है कि कश्मीर घाटी से आए हुए इन सभी प्रधानों ने मुझे जो वचन दिया था, उसको भली-भाँति निभाया; गाँव में जाकर के सब दूर लोगों को जागृत किया। अभी कुछ दिन पहले जब Board की exam हुई, तो कश्मीर के बेटे और बेटियों ने क़रीब 95%, पचानबे फ़ीसदी कश्मीर के छात्र-छात्राओं ने Board की परीक्षा में हिस्सा लिया। Board की परीक्षाओं में इतनी बड़ी तादाद में छात्रों का सम्मिलित होना, इस बात की ओर इशारा करता है कि जम्मू-कश्मीर के हमारे बच्चे उज्ज्वल भविष्य के लिये, शिक्षा के माध्यम से - विकास की नई ऊँचाइयों को पाने के लिये कृतसंकल्प हैं। उनके इस उत्साह के लिये, मैं छात्रों को तो अभिनन्दन करता हूँ, लेकिन उनके माता-पिता को, उनके परिजनों को, उनके शिक्षकों को और सभी ग्राम प्रधानों को भी ह्रदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।
 
प्यारे भाइयों और बहनों, इस बार जब मैंने ‘मन की बात’ के लिये लोगों के सुझाव मांगे, तो मैं कह सकता हूँ कि एकतरफ़ा ही सबके सुझाव आए। सब कहते थे कि 500/- और 1000/- वाले नोटों पर और विस्तार से बातें करें। वैसे 8 नवम्बर, रात 8 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन करते हुए, देश में सुधार लाने के एक महाभियान का आरम्भ करने की मैंने चर्चा की थी। जिस समय मैंने ये निर्णय किया था, आपके सामने प्रस्तुत रखा था, तब भी मैंने सबके सामने कहा था कि निर्णय सामान्य नहीं है, कठिनाइयों से भरा हुआ है। लेकिन निर्णय जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही उस निर्णय को लागू करना है। और मुझे ये भी अंदाज़ था कि हमारे सामान्य जीवन में अनेक प्रकार की नयी–नयी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। और तब भी मैंने कहा था कि निर्णय इतना बड़ा है, इसके प्रभाव में से बाहर निकलने में 50 दिन तो लग ही जाएँगे। और तब जाकर के normal अवस्था की ओर हम क़दम बढ़ा पाएँगे। 70 साल से जिस बीमारियों को हम झेल रहे हैं उस बीमारियों से मुक्ति का अभियान सरल नहीं हो सकता है। आपकी कठिनाइयों को मैं भली-भांति समझ सकता हूँ। लेकिन जब मैं आपका समर्थन देखता हूँ, आपका सहयोग देखता हूँ; आपको भ्रमित करने के लिये ढेर सारे प्रयास चल रहे हैं, उसके बावजूद भी, कभी-कभी मन को विचलित करने वाली घटनायें सामने आते हुए भी, आपने सच्चाई के इस मार्ग को भली-भांति समझा है, देशहित की इस बात को भली-भांति आपने स्वीकार किया है।
 
पाँच सौ और हज़ार के नोट और इतना बड़ा देश, इतनी करेंसियों की भरमार, अरबों-खरबों नोटें और ये निर्णय - पूरा विश्व बहुत बारीक़ी से देख रहा है, हर कोई अर्थशास्त्री इसका बहुत analysis कर रहा है, मूल्यांकन कर रहा है। पूरा विश्व इस बात को देख रहा है कि हिन्दुस्तान के सवा-सौ करोड़ देशवासी कठिनाइयाँ झेल करके भी सफलता प्राप्त करेंगे क्या! विश्व के मन में शायद प्रश्न-चिन्ह हो सकता है! भारत को भारत के सवा-सौ करोड़ देशवासियों के प्रति, सिर्फ़ श्रद्धा ही श्रद्धा है, विश्वास ही विश्वास है कि सवा-सौ करोड़ देशवासी संकल्प पूर्ण करके ही रहेंगे। और हमारा देश, सोने की तरह हर प्रकार से तप करके, निखर करके निकलेगा और उसका कारण इस देश का नागरिक है, उसका कारण आप हैं, इस सफलता का मार्ग भी आपके कारण ही संभव हुआ है।
 
पूरे देश में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय स्वराज संस्थाओं की सारी इकाइयाँ, एक लाख तीस हज़ार bank branch, लाखों बैंक कर्मचारी, डेढ़ लाख से ज़्यादा पोस्ट ऑफिस, एक लाख से ज़्यादा बैंक-मित्र - दिन-रात इस काम में जुटे हुए हैं, समर्पित भाव से जुटे हुए हैं। भाँति-भाँति के तनाव के बीच, ये सभी लोग बहुत ही शांत-चित्त रूप से, इसे देश-सेवा का एक यज्ञ मान करके, एक महान परिवर्तन का प्रयास मान करके कार्यरत हैं। सुबह शुरू करते हैं, रात कब पूरा होगा, पता तक नहीं रहता है, लेकिन सब कर रहे हैं। और उसी का कारण है कि भारत इसमें सफल होगा, ये स्पष्ट दिखाई दे रहा है। और मैंने देखा है कि इतनी कठिनाइयों के बीच बैंक के, पोस्ट ऑफिस के सभी लोग काम कर रहे हैं। और जब मानवता के मुद्दे की बात आ जाए, तो वो दो क़दम आगे दिखाई देते हैं। किसी ने मुझे कहा कि खंडवा में एक बुज़ुर्ग इंसान का accident हो गया। अचानक पैसों की ज़रूरत पड़ गई। वहाँ स्थानीय बैंक के कर्मचारी के ध्यान में आया और मुझे ये जान करके खुशी हुई कि ख़ुद जाकर के उनके घर, उस बुज़ुर्ग को उन्होंने पैसे पहुँचाए, ताकि इलाज़ में मदद हो जाए। ऐसे तो अनगिनत किस्से हर दिन टी.वी. में, मीडिया में, अख़बारों में, बातचीत में सामने आते हैं। इस महायज्ञ के अन्दर परिश्रम करने वाले, पुरुषार्थ करने वाले इन सभी साथियों का भी मैं ह्रदय से धन्यवाद करता हूँ। शक्ति की पहचान तो तब होती है, जब कसौटी से पार उतरते हैं। मुझे बराबर याद है, जब प्रधानमंत्री के द्वारा जन-धन योजना का अभियान चल रहा था और बैंक के कर्मचारियों ने जिस प्रकार से उसको अपने कंधे पर उठाया था और जो काम 70 साल में नहीं हुआ था, उन्होंने करके दिखाया था। उनके सामर्थ्य का परिचय हुआ। आज फिर एक बार, उस चुनौती को उन्होंने लिया है और मुझे विश्वास है कि सवा-सौ करोड़ देशवासियों का संकल्प, सबका सामूहिक पुरुषार्थ, इस राष्ट्र को एक नई ताक़त बना करके प्रशस्त करेगा।
 
लेकिन बुराइयां इतनी फैली हुई हैं कि आज भी कुछ लोगों की बुराइयों की आदत जाती नहीं है। अभी भी कुछ लोगों को लगता है कि ये भ्रष्टाचार के पैसे, ये काले धन, ये बेहिसाबी पैसे, ये बेनामी पैसे, कोई-न-कोई रास्ता खोज करके व्यवस्था में फिर से ला दूँ। वो अपने पैसे बचाने के फ़िराक़ में गैर-क़ानूनी रास्ते ढूंढ़ रहे हैं। दुःख की बात ये है कि इसमें भी उन्होंने ग़रीबों का उपयोग करने का रास्ता चुनने का पसंद किया है। ग़रीबों को भ्रमित कर, लालच या प्रलोभन की बातें करके, उनके खातों में पैसे डाल करके या उनसे कोई काम करवा करके, पैसे बचाने की कुछ लोग कोशिश कर रहे हैं। मैं ऐसे लोगों से आज कहना चाहता हूँ - सुधरना, न सुधरना आपकी मर्ज़ी, क़ानून का पालन करना, न करना आपकी मर्ज़ी, वो क़ानून देखेगा क्या करना? लेकिन, मेहरबानी करके आप ग़रीबों की ज़िंदगी के साथ मत खेलिए। आप ऐसा कुछ न करें कि record पर ग़रीब का नाम आ जाए और बाद में जब जाँच हो, तब मेरा प्यारा ग़रीब आपके पाप के कारण मुसीबत में फँस जाए। और बेनामी संपत्ति का इतना कठोर क़ानून बना है, जो इसमें लागू हो रहा है, कितनी कठिनाई आएगी। और सरकार नहीं चाहती है कि हमारे देशवासियों को कोई कठिनाई आए।
 
मध्य प्रदेश के कोई श्रीमान आशीष ने इस पाँच सौ और हज़ार के माध्यम से भ्रष्टाचार और काले धन के ख़िलाफ़ जो लड़ाई छेड़ी गयी है, उन्होंने मुझे टेलीफ़ोन किया है, उसे सराहा है: - “सर नमस्ते, मेरा नाम आशीष पारे है। मैं ग्राम तिराली, तहसील तिराली, ज़िला हरदा, मध्य प्रदेश का एक आम नागरिक हूँ। आप के द्वारा जो मुद्रा हज़ार-पाँच सौ के नोट बंद किए गए हैं, यह बहुत ही सराहनीय है। मैं चाहता हूँ कि ‘मन की बात’ में कई उदाहरण लोगों को बताइए कि लोगों ने असुविधा सहन करने के बावजूद भी उन्होंने राष्ट्र उन्नति के लिये यह कड़ा क़दम के लिए स्वागत किया है, जिससे लोग एक तरह से उत्साहवर्द्धित होंगे और राष्ट्र निर्माण के लिए cashless प्रणाली बहुत आवश्यक है और मैं पूरे देश के साथ हूँ और मैं बहुत खुश हूँ कि आपने हज़ार-पाँच सौ के नोट बंद करा दिए।’
 
वैसा ही मुझे एक फ़ोन कर्नाटक के श्रीमान येलप्पा वेलान्कर जी की तरफ़ से आया है: - ‘मोदी जी नमस्ते, मैं कर्नाटक का कोप्पल डिस्ट्रिक्ट का इस गाँव से येलप्पा वेलान्कर बात कर रहा हूँ। आपको मन से मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ, क्योंकि आपने कहा था कि अच्छे दिन आएँगे, लेकिन किसी ने भी नहीं सोचा कि ऐसा बड़ा क़दम आप उठाएँगे। पाँच सौ का और हज़ार का नोट, ये सब देखकर के काला धन और भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाया। हर एक भारत के नागरिक को इससे अच्छे दिन कभी नहीं आएँगे। इसी के लिए मैं आपको मनपूर्ण धन्यवाद करना चाहता हूँ।
 
कुछ बातें मीडिया के माध्यम से, लोगों के माध्यम से, सरकारी सूत्रों के माध्यम से जानने को मिलती हैं, तो काम करने का उत्साह भी बहुत बढ़ जाता है। इतना आनंद होता है, इतना गर्व होता है कि मेरे देश में सामान्य मानव का क्या अद्भुत सामर्थ्य है। महाराष्ट्र के अकोला में National Highway NH-6 वहाँ कोई एक restaurant है। उन्होंने एक बहुत बड़ा board लगाया है कि अगर आप की जेब में पुराने नोट हैं और आप खाना खाना चाहते हैं, तो आप पैसों की चिंता न करें, यहाँ से भूखा मत जाइए, खाना खा के ही जाइए और फिर कभी इस रास्ते से गुजरने का आ जाए आपको मौका, तो ज़रूर पैसे दे कर के जाना। और लोग वहाँ जाते हैं, खाना खाते हैं और 2-4-6 दिन के बाद जब वहाँ से फिर से गुजरते हैं, तो फिर से पैसे भी लौटा देते हैं। ये है मेरे देश की ताक़त, जिसमें सेवा-भाव, त्याग-भाव भी है और प्रामाणिकता भी है।
 
मैं चुनाव में चाय पर चर्चा करता था और सारे विश्व में ये बात पहुँच गई थी। दुनिया के कई देश के लोग चाय पर चर्चा शब्द भी बोलना सीख गए थे। लेकिन मुझे पता नहीं कि चाय पर चर्चा में, शादी भी होती है। मुझे पता चला कि 17 नवम्बर को सूरत में, एक ऐसी शादी हुई, जो शादी चाय पर चर्चा के साथ हुई। गुजरात में सूरत में एक बेटी ने अपने यहाँ शादी में जो लोग आए, उनको सिर्फ़ चाय पिलाई और कोई जलसा नहीं किया, न कोई खाने का कार्यक्रम, कुछ नहीं - क्योंकि नोटबंदी के कारण कुछ कठिनाई आई थी पैसों की। बारातियों ने भी उसे इतना ही सम्मान माना। सूरत के भरत मारू और दक्षा परमार - उन्होंने अपनी शादी के माध्यम से भ्रष्टाचार के खिलाफ़, काले धन के खिलाफ़, ये जो लड़ाई चल रही है, उसमें जो योगदान किया है, ये अपने आप में प्रेरक है। नवपरिणीत भरत और दक्षा को मैं बहुत-बहुत आशीर्वाद भी देता हूँ और शादी के मौके को भी इस महान यज्ञ में परिवर्तित करके एक नये अवसर में पलट देने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। और जब ऐसे संकट आते हैं, लोग रास्ते भी बढ़िया खोज लेते हैं।
 
मैंने एक बार टीवी न्यूज़ में देखा, रात देर से आया था, तो देख रहा था। असम में धेकियाजुली करके एक छोटा सा गाँव है। Tea-worker रहते हैं और Tea-worker को साप्ताहिक रूप से पैसे मिलते हैं। अब 2000 रुपये का नोट मिला, तो उन्होंने क्या किया? चार अड़ोस-पड़ोस की महिलायें इकट्ठी हो गयी और चारों ने साथ जाकर के ख़रीदी की और 2000 रुपये का नोट payment किया, तो उनको छोटी currency की जरुरत ही नहीं पड़ी, क्योंकि चारों ने मिलकर ख़रीदा और तय किया कि अगले हफ़्ते मिलेंगे, तब उसका हिसाब हम कर लेंगे बैठ करके। लोग अपने-आप रास्ते खोज रहे हैं। और इसका बदलाव भी देखिए! सरकार के पास एक message आया, असम के Tea garden के लोग कह रहे हैं कि हमारे यहाँ ATM लगाओ। देखिए, किस प्रकार से गाँव के जीवन में भी बदलाव आ रहा है। इस अभियान का कुछ लोगों को तत्काल लाभ मिल गया है। देश को तो लाभ आने वाले दिनों में मिलेगा, लेकिन कुछ लोगों को तो तत्काल लाभ मिल गया है। थोड़ा हिसाब पूछा, क्या हुआ है, तो मैंने छोटे-छोटे जो शहर हैं, वहाँ की थोड़ी जानकारी पाई। क़रीब 40-50 शहरों की जानकारी जो मुझे मिली कि इस नोट बंद करने के कारण उनके जितने पुराने पैसे बाक़ी थे, लोग पैसे नहीं देते थे tax के - पानी का tax नहीं, बिजली का नहीं, पैसे देते ही नहीं थे और आप भली-भाँति जानते हैं - ग़रीब लोग 2 दिन पहले जा कर के पाई-पाई चुकता करने की आदत रखते हैं। ये जो बड़े लोग होते हैं न, जिनकी पहुँच होती है, जिनको पता है कि कभी भी उनको कोई पूछने वाला नहीं है, वो ही पैसे नहीं देते हैं। और इसके लिए काफ़ी बकाया रहता है। हर municipality को tax का मुश्किल से 50% आता है। लेकिन इस बार 8 तारीख़ के इस निर्णय के कारण सब लोग अपने पुराने नोटें जमा कराने के लिए दौड़ गए। 47 शहरी इकाइयों में पिछले साल इस समय क़रीब तीन-साढ़े तीन हज़ार करोड़ रुपये का tax आया था। आपको जान कर के आश्चर्य होगा, आनंद भी होगा - इस एक सप्ताह में उनको 13 हज़ार करोड़ रुपये जमा हो गया। कहाँ तीन-साढ़े तीन हज़ार और कहाँ 13 हज़ार! और वो भी सामने से आकर के। अब उन municipality में 4 गुना ये पैसा आ गया, तो स्वाभाविक है, ग़रीब बस्तियों में गटर की व्यवस्था होगी, पानी की व्यवस्था होगी, आंगनबाड़ी की व्यवस्था होगी। ऐसे तो कई उदाहरण मिल रहे हैं कि जिसमें इसका सीधा-सीधा लाभ भी नज़र आने लगा है।
 
भाइयों-बहनों, हमारा गाँव, हमारा किसान ये हमारे देश की अर्थव्यवस्था की एक मज़बूत धुरी हैं। एक तरफ़ अर्थव्यवस्था के इस नये बदलाव के कारण, कठिनाइयों के बीच, हर कोई नागरिक अपने आपको adjust कर रहा है। लेकिन मैं मेरे देश के किसानों का आज विशेष रूप से अभिनंदन करना चाहता हूँ। अभी मैं इस फ़सल की बुआई के आँकड़े ले रहा था। मुझे ख़ुशी हुई, चाहे गेहूँ हो, चाहे दलहन हो, चाहे तिलहन हो; नवम्बर की 20 तारीख़ तक का मेरे पास हिसाब था, पिछले वर्ष की तुलना में काफ़ी मात्रा में बुआई बढ़ी है। कठिनाइयों के बीच भी, किसान ने रास्ते खोजे हैं। सरकार ने भी कई महत्वपूर्ण निर्णय किए हैं, जिसमें किसानों को और गाँवों को प्राथमिकता दी है। उसके बाद भी कठिनाइयाँ तो हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि जो किसान हमारी हर कठिनाइयाँ, प्राकृतिक कठिनाइयाँ हो, उसको झेलते हुए भी हमेशा डट करके खड़ा रहता है, इस समय भी वो डट करके खड़ा है।
हमारे देश के छोटे व्यापारी, वे रोजगार भी देते हैं, आर्थिक गतिविधि भी बढ़ाते हैं। पिछले बजट में हमने एक महत्वपूर्ण निर्णय किया था कि बड़े-बड़े mall की तरह गाँव के छोटे-छोटे दुकानदार भी अब चौबीसों घंटा अपना व्यापार कर सकते हैं, कोई क़ानून उनको रोकेगा नहीं। क्योंकि मेरा मत था, बड़े-बड़े mall को 24 घंटे मिलते हैं, तो गाँव के ग़रीब दुकानदार को क्यों नहीं मिलना चाहिये? मुद्रा-योजना से उनको loan देने की दिशा में काफी initiative लिए। लाखों-करोड़ों रुपये मुद्रा-योजना से ऐसे छोटे-छोटे लोगों को दिए, क्योंकि ये छोटा कारोबार, करोड़ों की तादाद में लोग करते हैं और अरबों-खरबों रुपये के व्यापार को गति देते हैं। लेकिन इस निर्णय के कारण उनको भी कठिनाई होना स्वाभाविक था। लेकिन मैंने देखा है कि अब तो हमारे इन छोटे-छोटे व्यापारी भी technology के माध्यम से, Mobile App के माध्यम से, मोबाइल बैंक के माध्यम से, क्रेडिट कार्ड के माध्यम से, अपने-अपने तरीक़े से ग्राहकों की सेवा कर रहे हैं, विश्वास के आधार पर भी कर रहे हैं। और मैं अपने छोटे व्यापारी भाइयो-बहनों से कहना चाहता हूँ कि मौका है, आप भी digital दुनिया में प्रवेश कर लीजिए। आप भी अपने मोबाइल फ़ोन पर बैंकों की App download कर दीजिए। आप भी क्रेडिट कार्ड के लिए POS मशीन रख लीजिए। आप भी बिना नोट कैसे व्यापार हो सकता है, सीख लीजिए। आप देखिए, बड़े-बड़े मॉल technology के माध्यम से अपने व्यापार को जिस प्रकार से बढ़ाते हैं, एक छोटा व्यापारी भी इस सामान्य user friendly technology से अपना व्यापार बढ़ा सकता है। बिगड़ने का तो सवाल ही नहीं उठता है, बढ़ाने का अवसर है। मैं आप को निमंत्रण देता हूँ कि cashless society बनाने में आप बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं, आप अपने व्यापार को बढ़ाने में, mobile phone पर पूरी banking व्यवस्था खड़ी कर सकते हैं और आज नोटों के सिवाय अनेक रास्ते हैं, जिससे हम कारोबार चला सकते हैं। technological रास्ते हैं, safe है, secure है और त्वरित है। मैं चाहूँगा कि आप सिर्फ़ इस अभियान को सफल करने के लिए मदद करें, इतना नहीं, आप बदलाव का भी नेतृत्व करें और मुझे विश्वास है, आप बदलाव का नेतृत्व कर सकते हैं। आप पूरे गाँव के कारोबार में ये technology के आधार पर काम कर सकते हैं, मेरा विश्वास है।I मैं मज़दूर भाइयों-बहनों को भी कहना चाहता हूँ, आप का बहुत शोषण हुआ है। कागज़ पर एक पगार होता है और जब हाथ में दिया जाता है, तब दूसरा होता है। कभी पगार पूरा मिलता है, तो बाहर कोई खड़ा होता है, उसको cut देना पड़ता है और मज़दूर मजबूरन इस शोषण को जीवन का हिस्सा बना देता है। इस नई व्यवस्था से हम चाहते हैं कि आपका बैंक में खाता हो, आपके पगार के पैसे आपके बैंक में जमा हों, ताकि minimum wages का पालन हो। आपको पूरा पैसा मिले, कोई cut ना करे। आपका शोषण न हो। और एक बार आपके बैंक खाते में पैसे आ गए, तो आप भी तो छोटे से मोबाइल फ़ोन पर - कोई बड़ा smart phone की ज़रूरत नहीं हैं, आजकल तो आपका mobile phone भी ई-बटुवे का काम करता है - आप उसी mobile phone से अड़ोस-पड़ोस की छोटी-मोटी दुकान में जो भी खरीदना है, खरीद भी सकते हैं, उसी से पैसे भी दे सकते हैं। इसलिए मैं मज़दूर भाइयों-बहनों को इस योजना में भागीदार बनने के लिए विशेष आग्रह करता हूँ, क्योंकि आखिरकार इतना बड़ा मैंने निर्णय देश के ग़रीब के लिये, किसान के लिये, मज़दूर के लिये, वंचित के लिये, पीड़ित के लिये लिया है, उसका benefit उसको मिलना चाहिए।
आज मैं विशेष रूप से युवक मित्रों से बात करना चाहता हूँ। हम दुनिया में गाजे-बाजे के साथ कहते हैं कि भारत ऐसा देश है कि जिसके पास 65% जनसंख्या, 35 साल से कम उम्र की है। आप मेरे देश के युवा और युवतियाँ, मैं जानता हूँ, मेरा निर्णय तो आपको पसन्द आया है। मैं ये भी जानता हूँ कि आप इस निर्णय का समर्थन करते हैं। मैं ये भी जानता हूँ कि आप इस बात को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाने के लिए बहुत योगदान भी करते हैं। लेकिन दोस्तो, आप मेरे सच्चे सिपाही हो, आप मेरे सच्चे साथी हो। माँ भारती की सेवा करने का एक अद्भुत मौका हमारे सामने आया है, देश को आर्थिक ऊंचाइयों पर ले जाने का अवसर आया है। मेरे नौजवानो, आप मेरी मदद कर सकते हो क्या? मुझे साथ दोगे, इतने से बात बनने वाली नहीं है। जितना आज की दुनिया का अनुभव आपको है, पुरानी पीढ़ी को नहीं है। हो सकता है, आपके परिवार में बड़े भाई साहब को भी मालूम नहीं होगा और माता-पिता, चाचा-चाची, मामा-मामी को भी शायद मालूम नहीं होगा। आप App क्या होती है, वो जानते हो, online banking क्या होता है, जानते हो, online ticket booking कैसे होता है, आप जानते हो। आपके लिये चीज़ें बहुत सामान्य हैं और आप उपयोग भी करते हो। लेकिन आज देश जिस महान कार्य को करना चाहता है, हमारा सपना है cashless society। ये ठीक है कि शत-प्रतिशत cashless society संभव नहीं होती है। लेकिन क्यों न भारत less-cash society की तो शुरुआत करे। एक बार अगर आज हम less-cash society की शुरुआत कर दें, तो cashless society की मंज़िल दूर नहीं होगी। और मुझे इसमें आपकी physical मदद चाहिए, ख़ुद का समय चाहिए, ख़ुद का संकल्प चाहिए। और आप मुझे कभी निराश नहीं करोगे, मुझे विश्वास है, क्योंकि हम सब हिंदुस्तान के ग़रीब की ज़िंदगी बदलने की इच्छा रखने वाले लोग हैं। आप जानते हैं, cashless society के लिये, digital banking के लिये या mobile banking के लिये आज कितने सारे अवसर हैं। हर बैंक online सुविधा देता है। हिंदुस्तान के हर एक बैंक की अपनी mobile app है। हर बैंक का अपना wallet है। wallet का सीधा-सीधा मतलब है e-बटुवा। कई तरह के card उपलब्ध हैं। जन-धन योजना के तहत भारत के करोड़ों-करोड़ ग़रीब परिवारों के पास Rupay Card है और 8 तारीख़ के बाद तो जो Rupay Card का बहुत कम उपयोग होता था, गरीबों ने Rupay Card का उपयोग करना शुरू किया और क़रीब-करीब 300% उसमें वृद्धि हुई है। जैसे mobile phone में prepaid card आता है, वैसा बैंकों में भी पैसा ख़र्च करने के लिये prepaid card मिलता है। एक बढ़िया platform है, कारोबार करने की UPI, जिससे आप ख़रीदी भी कर सकते हैं, पैसे भी भेज सकते हैं, पैसे ले भी सकते हैं। और ये काम इतना simple है जितना कि आप WhatsApp भेजते हैं। कुछ भी ना पढ़ा-लिखा व्यक्ति होगा, उसको भी आज WhatsApp कैसे भेजना है, वो आता है, forward कैसे करना है, आता है। इतना ही नहीं, technology इतनी सरल होती जा रही है कि इस काम के लिए कोई बड़े smart phone की भी आवश्यकता नहीं है। साधारण जो feature phone होता है, उससे भी cash transfer हो सकती है। धोबी हो, सब्ज़ी बेचनेवाला हो, दूध बेचनेवाला हो, अख़बार बेचनेवाला हो, चाय बेचनेवाला हो, चने बेचनेवाला हो, हर कोई इसका आराम से उपयोग कर सकता है। और मैंने भी इस व्यवस्था को और अधिक सरल बनाने के लिए और ज़ोर दिया है। सभी बैंक इस पर लगी हुई हैं, कर रही हैं। और अब तो हमने ये online surcharge का भी ख़र्चा आता था, वो भी cancel कर दिया है। और भी इस प्रकार के कार्ड वगैरह का जो ख़र्चा आता था, उसे आपने देखा होगा पिछले 2-4 दिन में अख़बारों में, सारे ख़र्चे ख़त्म कर दिए, ताकि cashless society की movement को बल मिले।

मेरे नौजवान दोस्तो, ये सब होने के बाद भी एक पूरी पीढ़ी ऐसी है कि जो इससे अपरिचित है। और आप सभी लोग, मैं भली-भांति जानता हूँ, इस महान कार्य में सक्रिय हैं। WhatsApp पर जिस प्रकार के creative message आप देते हैं - slogan, कवितायेँ, किस्से, cartoon, नयी-नयी कल्पना, हंसी-मज़ाक - सब कुछ मैं देख रहा हूँ और चुनौतियों के बीच ये हमारी युवा पीढ़ी की जो सृजन शक्ति है, तो ऐसा लग रहा है, जैसे ये भारत भूमि की विशेषता है कि किसी ज़माने में युद्ध के मैदान में गीता का जन्म हुआ था, वैसे ही आज इतने बड़े बदलाव के काल से हम गुजर रहे हैं, तब आपके अन्दर भी मौलिक creativity प्रकट हो रही है। लेकिन मेरे प्यारे नौजवान मित्रो, मैं फिर एक बार कहता हूँ, मुझे इस काम में आपकी मदद चाहिए। जी-जी-जी, मैं दुबारा कहता हूँ, मुझे आपकी मदद चाहिए और आप, आप मुझे विश्वास है मेरे देश के करोड़ों नौजवान इस काम को करेंगे। आप एक काम कीजिए, आज से ही संकल्प लीजिए कि आप स्वयं cashless society के लिए ख़ुद एक हिस्सा बनेंगे। आपके mobile phone पर online ख़र्च करने की जितनी technology है, वो सब मौजूद होगी। इतना ही नहीं, हर दिन आधा-घंटा, घंटा, दो घंटा निकाल करके कम से कम 10 परिवारों को आप ये technology क्या है, technology का कैसे उपयोग करते हैं, कैसे अपनी बैंकों की App download करते हैं? अपने खाते में जो पैसे पड़े हैं, वो पैसे कैसे ख़र्च किए जा सकते हैं? कैसे दुकानदार को दिए जा सकते हैं? दुकानदार को भी सिखाइये कि कैसे व्यापार किया जा सकता है? आप स्वेच्छा से इस cashless society, इन नोटों के चक्कर से बाहर लाने का महाभियान, देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने का अभियान, काला-धन से मुक्ति दिलाने का अभियान, लोगों को कठिनाइयों-समस्याओं से मुक्त करने का अभियान - इसका नेतृत्व करना है आपको। एक बार लोगों को Rupay Card का उपयोग कैसे हो, ये आप सिखा देंगे, तो ग़रीब आपको आशीर्वाद देगा। सामान्य नागरिक को ये व्यवस्थायें सिखा दोगे, तो उसको तो शायद सारी चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी और ये काम अगर हिंदुस्तान के सारे नौजवान लग जाएँ, मैं नहीं मानता हूँ, ज्यादा समय लगेगा। एक महीने के भीतर-भीतर हम विश्व के अन्दर एक नये आधुनिक हिंदुस्तान के रूप में खड़े हो सकते हैं और ये काम आप अपने mobile phone के ज़रिये कर सकते हो, रोज़ 10 घरों में जाकर के कर सकते हो, रोज़ 10 घरों को इसमें जोड़ करके कर सकते हो। मैं आपको निमंत्रण देता हूँ – आइए, सिर्फ समर्थन नहीं, हम इस परिवर्तन के सेनानी बनें और परिवर्तन लेकर ही रहेंगे। देश को भ्रष्टाचार और काले-धन से मुक्त करने की ये लड़ाई को हम आगे बढ़ाएँगे और दुनिया में बहुत देश हैं, जहाँ के नौजवानों ने उस राष्ट्र के जीवन को बदल दिया है और ये बात माननी पड़ेगी, जो बदलाव लाता है, वो नौजवान लाता है, क्रांति करता है, वो युवा करता है। केन्या, उसने बीड़ा उठाया, M-PESA ऐसी एक mobile व्यवस्था खड़ी की, technology का उपयोग किया, M-PESA नाम रखा और आज क़रीब-क़रीब Africa के इस इलाक़े में केन्या में पूरा कारोबार इस पर shift होने की तैयारी में आ गया है। एक बड़ी क्रांति की है इस देश ने।
मेरे नौजवानों, मैं फिर एक बार, फिर एक बार बड़े आग्रह से आपको कहता हूँ कि आप इस अभियान को आगे बढ़ाइए। हर school, college, university, NCC, NSS, सामूहिक रूप से, व्यक्तिगत रूप से इस काम को करने के लिए मैं आपको निमंत्रण देता हूँ। हम इस बात को आगे बढ़ाएँ। देश की उत्तम सेवा करने का हमें अवसर मिला है, मौक़ा गंवाना नहीं है।
प्यारे भाइयो-बहनो, हमारे देश के एक महान कवि - श्रीमान हरिवंशराय बच्चन जी का आज जन्म-जयंती का दिन है और आज हरिवंशराय जी के जन्मदिन पर श्रीमान अमिताभ बच्चन जी ने “स्वच्छता अभियान” के लिये एक नारा दिया है। आपने देखा होगा, इस सदी के सर्वाधिक लोकप्रिय कलाकार अमिताभ जी स्वच्छता के अभियान को बहुत जी-जान से आगे बढ़ा रहे हैं। जैसे लग रहा है कि स्वच्छता का विषय उनके रग-रग में फैल गया है और तभी तो अपने पिताजी की जन्म-जयंती पर भी उनको स्वच्छता का ही काम याद आयाI उन्होंने लिखा है कि हरिवंशराय जी की एक कविता है और उसकी एक पंक्ति उन्होंने लिखी है ”मिट्टी का तन, मस्ती का मन, क्षण भर जीवन, मेरा परिचय।“ हरिवंशराय जी इसके माध्यम से अपना परिचय दिया करते थेI ‘मिट्टी का तन, मस्ती का मन, क्षण भर जीवन, मेरा परिचय’, तो उनके सुपुत्र श्रीमान अमिताभ जी ने, जिसकी रगों में स्वच्छता का mission दौड़ रहा है, उन्होंने मुझे लिखकर के भेजा है हरिवंशराय जी की कविता का उपयोग करते हुए - “‘स्वच्छ तन, स्वच्छ मन, स्वच्छ भारत, मेरा परिचय”’। मैं हरिवंशराय जी को आदर-पूर्वक नमन करता हूँ। श्रीमान अमिताभ जी को भी ‘मन की बात’ में इस प्रकार से जुड़ने के लिये और स्वच्छता के काम को आगे बढ़ाने के लिये भी धन्यवाद करता हूँ।

Friday, November 25, 2016

बड़ी कार्रवाई की तैयारी में सरकार, नोट जमा कराया है तो स्त्रोत भी बताना होगा



नोटबंदी के फैसले के बाद उन लोगों पर कार्रवाई की तैयारी है जो अपने बैंक खाते में काली कमाई की भारी-भरकम राशि जमा करा रहे हैं।

नई दिल्ली, (जागरण ब्यूरो)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ ही दिन पहले यह कहा है कि नोटबंदी के साथ काले धन के खिलाफ शुरू की गई लड़ाई सिर्फ शुरुआत है। मोदी की इस बात को अमली जामा पहनाने का काम भी शुरू हो गया है। सबसे पहले तो नोटबंदी के फैसले के बाद उन लोगों पर कार्रवाई की तैयारी है जो अपने बैंक खाते में काली कमाई की भारी-भरकम राशि जमा करा रहे हैं। अब इन्हें जमा राशि का स्त्रोत भी बताना होगा। साथ ही काली कमाई को सोने में तब्दील कर रहे लोगों पर लगाम लगाने के लिए हर घर में पीली धातु रखने की सीमा तय करने का विकल्प भी है। लेकिन सरकार फिलहाल यह विकल्प आजमाने की किसी भी संभावना से इनकार कर रही है।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में काले धन पर लगाम लगाने के अन्य तरीकों पर भी विचार किया गया। सरकार के सामने हर घर के लिए सोना रखने की सीमा तय करने का प्रस्ताव आया है। वैसे, सरकार अभी इस प्रस्ताव को लेकर बहुत उत्साहित नहीं है। इसके बड़े सामाजिक व राजनीतिक असर को देखते हुए इसको आजमाने का खतरा फिलहाल सरकार नहीं उठाना चाहती।

नोटबंदी : दोनों सदनों में हंगामे के बाद सोमवार तक के लिए कार्यवाही स्थगित
आयकर सीमा से कम राशि रखने पर भी होगी जांच
नोटबंदी का फैसला आठ नवंबर को हुआ है। आंकड़े बता रहे हैं कि उसके बाद बैंकों की जमाराशि में काफी बड़ी वृद्धि हुई है। इस बात की आशंका है कि कई लोगों ने अपने खाते में काले धन को भी जमा कराया है। आयकर विभाग जिसे भी पकड़ेगा, उसे अपने खाते में जमा राशि के स्त्रोत व अन्य जानकारी देनी होगी। अगर वे धन के वैध स्त्रोत के बारे में नहीं बता पाए तो उनके खिलाफ जुर्माना लगाने के दो विकल्प तैयार करने का प्रस्ताव किया गया है। पहला प्रस्ताव यह है कि जिस राशि का स्त्रोत नहीं बताया गया है, उस पर 50 फीसद तक जुर्माने के साथ चार वर्षो तक खाते से पैसा नहीं निकालने का लॉक-इन पीरियड लागू हो। दूसरा विकल्प, उन लोगों के लिए है, जो धनराशि के बारे में स्वयं नहीं बताते हैं। इन्हें अघोषित आय पर 90 फीसद तक टैक्स देना पड़ सकता है। इस तरह से 200 फीसद का टैक्स लगाने का मौजूदा प्रस्ताव खत्म किया जा रहा है।
लॉक-इन पीरियड के बारे में सूत्रों ने बताया कि कई प्रस्तावों पर विचार करने के बाद इस पर सहमति बनी है कि कुल जमा राशि के एक चौथाई हिस्से को चार वर्षो तक ब्याज रहित स्कीम के तहत जमा किया जाए। लेकिन यह उन्हीं लोगों पर लागू होगा, जिन्होंने नोटबंदी की घोषणा के बाद बैंक खाते में 500 या 1000 के पुराने नोट जमा किए हैं और उसको स्त्रोत नहीं बता पाए हैं। यह भी स्पष्ट किया कि विभाग की जांच में बैंक खाते में आयकर की सीमा 2.50 लाख रुपये से कम राशि रखने वाले ग्राहकों को भी शामिल किया जाएगा। इस तरह से जन धन खातों में बड़ी मात्रा में जमा की गई राशि का मामला भी इस जांच का हिस्सा बन जाएगा।


Sunday, November 20, 2016

आज करोड़ों लोगों को 2-2 लाख रुपए देने जा रहे हैं मोदी, जल्दी करें आवेदन

NEW DELHI: NOTE BAN के की अफरातफरी के बीच मोदी सरकार आज देश के गरीब लोगों को बड़ा तोहफा देने जा रही है। करोड़ों लोगों को आवास योजना के तहत दो दो लाख रुपए दिए जाएंगे। 
नरेंद्र मोदी सरकार एक और महत्वकांक्षी योजना के तहत लोगों को तोहफा देने वाली है. सरकार ने गुरूवार बताया कि 'सबको आवास' योजना के तहत एक करोड़ मकान बनाने की योजना बनाई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज आगरा में इस योजना का शुभारंभ करेंगे।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दौरान बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 20 नवंबर को उत्तर प्रदेश के आगरा में इस योजना का शुभारंभ करेंगे जिसके तहत अगले तीन वर्ष में एक करोड़ आवासों का निर्माण किया जाना है। उन्होंने साक्षी महाराज के सवाल का जवाब देते हुए कहा, 'सरकार की परिकल्पना के अनुरूप 'वर्ष 2022 तक सभी के लिए मकान' के उद्देश्य को पूरा करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तरप्रदेश सहित पूरे देश में पूर्ववर्ती इंदिरा आवास योजना को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में पुनर्गठित करने को मंजूरी दी है। 
उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत 2016.17 से लेकर 2018.19 तक तीन वर्षों में एक करोड़ मकान बनाने की परिकल्पना की गई है. तोमर के अनुसार योजना के अंतर्गत मैदानी क्षेत्र में 1.20 लाख रुपए और पर्वतीय क्षेत्रों में 1.30 लाख रुपए की सहायता प्रदान की जाएगी। 
उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में 33 लाख मकानों का निर्माण किया जाएगा.तोमर ने साक्षी महाराज के एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि योजना के तहत उत्तर प्रदेश में अगले तीन साल में 12 लाख मकान बनाए जाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगरा पहुंच चुके हैं। उन्होंने यहां पहुंचकर सबसे पहले ग्रामीण आवास योजना के लाभार्थियों से मुलाकात की और योजना का शुभारंभ किया।

आगरा (जेएनएन)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगरा पहुंच चुके हैं। उन्होंने यहां पहुंचकर सबसे पहले ग्रामीण आवास योजना के लाभार्थियों से मुलाकात की। इसके बाद इस योजना का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने 5 लाभार्थियों को दिए खुद आवास आवंटन पत्र सौंपे। बटन दबाकर मथुरा-पलवल चौथी लाइन परियोजना का शिलान्यास किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना और ग्रामीण आवास योजना का भी उद्घाटन किया। आगरा के कोठी मीना बाजार मैदान में पीएम की रैली शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री का भाषण शुरू हो गया है। वह आज आगरा में परिवर्तन रैली को संबोधित करने आए हैं। इस रैली के बहाने विधानसभा चुनाव के दावेदारों की को परख भी हो रही है। रैली के लिए 20 विधानसभा क्षेत्रो से भीड़ जुटी है।
रेल हादसे से दुःखी पीएम ने स्वागत से मना कियामोदी ने इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे पर से दुख व्यक्त किया और इस दुःख की अभिव्यक्ति उन्होंने स्वागत करने से मना करके की। उन्होंने कहा कि लोग कष्ट उठाकर मुझे आर्शीवाद देने आए हैं। वह उन सबका सबका धन्यवाद करते हैं। पीएम ने रेल हादसे के पीड़तों को मदद की घोषणा की और हादसे के कारणों की जांच कराने का वादा किया

Saturday, November 19, 2016

14 coaches of Patna-Indore Express derail, 45 bodies recovered


Uttar Pradesh chief minister Akhilesh Yadav has asked the director-general of police to personally monitor the rescue operations while railway minister Suresh Prabhu has ordered an inquiry into the accident.

Buses have been pressed into service to help passengers complete their journey, Northern Central Railways spokesperson Vijay Kumar Kumar said, adding that there are possibilities of casualties in the S2 coach which is severely damaged.

District administration along with railway officials are carrying out rescue and relief operations. Four AC coaches have also been derailed, he added.

Meanwhile, DIG (Kanpur range) Rajesh Modak said that two bogies of the train have been severely damaged and many people are feared dead.

Railways has also released helpline numbers — Indore - 07411072, Ujjain - 07342560906, Ratlam - 074121072, Orai - 051621072, Jhansi - 05101072, Pokhraya - 05113270239.

नोटबंदी के बाद खातों में बड़ी नकदी जमा कराने वालों को नोटिस


नोटिस उन्हीं मामलों में जारी किए जा रहे हैं जहां विभाग को संदेह है कि ऐसा काले धन को छुपाने के लिए किया गया है। 
नई दिल्ली, प्रेट्र। नोटबंदी के बाद दूसरों के काले धन को अपने खातों में जमा कराने वालों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। सरकार उनके खाते में आई पाई-पाई का हिसाब लेगी। इस दिशा में तत्परता दिखाते हुए आयकर विभाग ने सैकड़ों नोटिस जारी किए हैं। इनमें ऐसे लोगों और कंपनियों से आय का स्रोत बताने को कहा गया है जिन्होंने आठ नवंबर के बाद खातों में 500 और 1000 के नोट में बड़ी राशि जमा की है।
अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में पूरे देश में जांच शुरू हो गई है। विभाग ने आयकर अधिनियम की धारा 133 (6) के तहत नोटिस जारी किए हैं। यह कानून उसे सूचना लेने का अधिकार देता है। बैंकों की तरफ से

बताया गया कि कुछ मामलों में उनके खातों में असामान्य रूप से बड़ी मात्रा में नकदी जमा कराई गई है। इनमें खासतौर से वे खाते हैं जिनमें अचानक ढाई लाख रुपये से ज्यादा जमा कराए गए हैं। इसी के बाद विभाग ने हरकत में आते हुए नोटिस जारी किए।
नोटिस उन्हीं मामलों में जारी किए जा रहे हैं जहां विभाग को संदेह है कि ऐसा काले धन को छुपाने के लिए किया गया है। इन नोटिसों में पुराने नोटों में जमा कराई गई राशि और तारीख बताने को कहा गया है। इनके पक्ष में दस्तावेज, लेखा और बिल मांगे गए हैं। नोटिस कहती है कि अगर विभाग ने आपका आकलन किया है तो बीते दो साल के आयकर रिटर्न की प्रति भी दर्ज करें

Friday, November 18, 2016

शनिवार को बैंक में सिर्फ बुजुर्ग बदल पाएंगे पैसा, बाकी का काम पहले की तरह

नई दिल्ली: नोटबंदी के फैसले के बाद से सरकार रोज आम आदमी को राहत देने के लिए कदम उठा रही है. इसी दिशा में अब इंडियन बैंक एसोसिएशन सामने आया.
इंडियन बैंक एसोसिएशन ने ऐलान किया है कि कल यानी शनिवार को बैंक में सिर्फ बुजुर्ग ही पैसा बदल पाएंगे. इसके अलावा जमा और निकासी का काम पहले की ही तरह होता रहेगा. ये फैसला सिर्फ शनिवार के लिए ही है.
कल सरकार ने राहत देते हुए ऐलान किया था कि अब देश के पेट्रोल पंप से भी कार्ड स्वाइप कर 2000 रुपये तक नकदी ली जा सकती है. आज देश के 686 पेट्रोल पंप से कैश मिलना भी शुरू हो गया था.
हालांकि सरकार की तरफ से दावा था कि आज देश के करीब 3043 पेट्रोल पंप पर डेबिट कार्ड स्वाइप कराके 2 हजार रुपए मिल पाएंगे. लेकिन दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, पटना, भोपाल समेत देश के कई शहरों में एबीपी न्यूज ने जब सुबह पड़ताल की तो पता चला ये सुविधा आज पूरी तरह लागू नहीं हो पाई. शाम 4 बजे के बाद 686 पेट्रोल पंप से कैश मिलने की बात कही गई.

पेट्रोल पंप से कैश लेने के लिए आपको क्या करना होगा-
– इसके लिए आपको पेट्रोल पंप पर अपने डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करना होगा.
– जिस तरह से आप कोई सामान खरीदने के लिए डेबिट कार्ड को मशीन में स्वाइप करते हैं, उसी तरह आपको अपना कार्ड स्वाइप करना होगा, जिसके बदले में पेट्रोल पंप की तरफ से 2000 रुपए नगद आपको मिल जाएंगे
– फिलहाल ये सुविधा देश के उन 2500 पेट्रोल पंप पर ही मिलेगी जहां एसबीआई की स्वाइप मशीन लगी होगी
– अगले 3 दिनों में ये सुविधा देश के 20 हजार पेट्रोल पंप पर भी मिलने लगेगी
– अगले 3 दिनों में उन पेट्रोल पंप पर ये सुविधा मिलेगी जहां HDFC, Citibank और ICICI की कार्ड स्वाइप मशीन होगी
– हालांकि एक दिन में एक डेबिट कार्ड से एक बार ही इस सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकेगा
– बैंक और एटीएम में लाइन कम करने के मकसद से शुरू की जा रही ये सुविधा 24 नवंबर के बाद भी जारी रहेगी

Wednesday, November 16, 2016

2000 रुपए का नोट असली है कि नकली ऐसे पहचानें, यह है आसान तरीका

जी न्यूज़ पोर्टल की बिजनेस टीम आपको एक खास टिप्स बताने जा रही है जिसके जरिए आप आसानी से समझ लेंगे कि आपके वॉलेट में रखा 2000 रुपए का नोट असली है या नकली। 
नई दिल्ली: केंद्र सरकार की तरफ से 500 और 1000 रुपए के बड़े नोट बैन किए जाने के बाद बाजार में अब 2000 रुपए का नया नोट भी आ चुका है। हालांकि 2000 रुपए के नोट को लेकर आम लोगों में थोड़ा असमंजस की स्थिति है। हाल ही में सामने आई एक खबर ने लोगों को 2000 रुपए के नए नोट से थोड़ा सतर्क कर दिया है। बीते दिन आई एक खबर में बताया गया था कि किसी ने एक किसान को 2000 रुपए के नए नोट की फोटो कॉपी थमाकर ठग लिया था। यह मामला कर्नाटक का था। ऐसे में जागरण डॉट कॉम की बिजनेस टीम आपको एक खास टिप्स बताने जा रही है जिसके जरिए आप आसानी से समझ लेंगे कि आपके वॉलेट में रखा 2000 रुपए का नोट असली है या नकली।

2000 रुपए का नया नोट गीला होने पर रंग छोड़ने लगता है। हम मजाक नहीं कर रहे बल्कि यह 100 फीसदी सही बात है और ऐसा हम बिल्कुल नहीं कह रहे हैं बल्कि यह बात खुद इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी शक्तिकांत दास ने कही है। उन्होंने खुद बताया कि अगर आपके हाथ में रखा 2000 रुपए का नया नोट गीला होने पर रंग नहीं छोड़ता है तो समझ जाइएगा कि यह नकली नोट है। दास ने बताया, “नई करेंसी के नोट गीला होने पर रंग छोड़ते हैं, क्योंकि ये नोट जिस पेपर से बने हैं उसकी प्रकृति ही ऐसी है।” 
आपको बता दें कि शक्तिकांत दास ने यह बयान ऐसे मौके पर आया है जब हाल ही में इंटरनेट पर लोगों ने एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें दिखाया गया था कि नए नोट कलर छोड़ रहे हैं
17 फीचर्स में जानें नए 2000 के नोट की खासियत
#1. नोट के आगे की तरफ सी थ्रू रजिस्टर में दो हजार रुपए लिखा होगा। आईडेंटिफिकेशन मार्क के ऊपर screenshot001दिखा वाली फूल सी आकृति सी थ्रू रजिस्टर के नाम से जानी जाती है। दो हजार के नोट में फूल की जगह इसका मूल्य होगा। जो रोशनी में दिखेगा।
#2. नोट पर दो हजार की लेटेंट इमेज भी होगी। गांधीजी की फोटो के साइड में लेटेंट इमेज होती है। इसमें जितने का नोट है उसकी संख्या लिखी होती है।
#3. नोट में देवनागरी में भी नोट की वैल्यू यानी 2000 लिखा होगा।
#4. इसके बीच में महात्मा गांधी की पोट्रेट होगी।
#5. लेफ्ट साइड में छोटे अक्षरों में आरबीआई और दो हजार लिखा होगा।
#6. सिक्युरिटी थ्रेड में ‘भारत’,आरबीआई और 2000 लिखा होगा। नोट को झुकाने पर इसका कलर ‘थ्रेड ग्रीन’ से ‘ब्लू रंग’ में बदलेगा।
#7. नोट के दाएं तरफ गारंटी क्लॉज, प्रॉमिस क्लॉज और गवर्नर के सिग्नेचर होंगे। वहीं इसी तरफ आरबीआई का चिन्ह भी होगा।
#8. नीचे से दाएं तरफ रुपए का सिंबल के साथ 2000 लिखा होगा। ये कलर चेंज इंक में लिखा है। जो ग्रीन से ब्लू रंग में बदलेगा।
#9.नोट के ऊपर से लेफ्ट साइड और नीचे से राइट साइड नंबर पैनल होगा। पैनल में नंबर छोटे से बड़े होंगे। कमजोर आंखों वालों के लिए महात्मा गांधी की पोट्रेट, अशोक पिलर और ब्लीड लाइन और आइडेंटिटी मार्क उभरा हुआ होगा।
#10.दाएं तरफ 2000 का इलेक्ट्रोटाइप वाटरमार्क होगा।
#11.नोट के दाएं तरफ ही अशोका पिलर होगा।
#12.राइट साइड में रेकट्राइंगल का साइन उभरा हुआ होगा। जिसमें 2000 लिखा होगा।
#13.लेफ्ट और राइट साइड सात एंगुलर ब्लीड लाइन उभरी हुई होगी।
# क्या कहा आरबीआई ने?
– आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने मंगलवार को कहा था, “जल्दी ही नए नोट मार्केट में लाने के लिए प्रोडक्शन बढ़ाएंगे।”
– “आरबीआई और डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स में कंट्रोल रूम बना रहे हैं।”
– फाइनेंस सेक्रेटरी शशिकांत दास ने बताया था- “सरकार एक बड़ा फैसला है। नए नोट 10 नवंबर के बाद मिलने शुरू हो जाएंगे।”
# सरकार ने 500 और 1000 रुपए के नोट बंद क्यों किए?
– सरकार करप्शन और ब्लैकमनी पर अंकुश लगाना चाहती है। क्योंकि इसका इस्तेमाल आतंकवाद के लिए किया जा रहा था।
– जाली नोट की खपत को रोका जा सकेगा।
# कहां बदल सकते हैं नोट?
500 और 1000 के नोट आप बैंक और पोस्ट ऑफिस में बदल सकते हैं।
# कब तक बदल सकते हैं?
– 10 नंवबर से 30 दिसंबर तक। लेकिन साथ में पहचान पत्र लाना होगा।
# इसके बाद भी क्या बदले जा सकते हैं?
– घोषणा पत्र के साथ ये नोट 31 मार्च 2017 तक जमा आरबीआई में जमा करा सकते हैं।

Sunday, November 13, 2016

LIVE- कड़क चाय बनाने की आदत थी, निर्णय भी कड़क लेता हूंः मोदी


प्रधानमंत्री ने गाजीपुर में मऊ-ताड़ीघाट नई लाईन के गाजीपुर सिटी-बलिया रेलखंड के दोहरीकरण का शिलान्यास व गाजीपुर सिटी-कोलकाता साप्ताहिक सुपरफास्ट 'शब्द भेदी ' को हरी झंडी दिखाई। 
गाजीपुर (जेएनएन)। प्रधानमंत्री ने गाजीपुर में वीर अब्दुल हमीद को प्रणाम करते हुये कहा कि मैं दूसरी बार गाजीपुर आया हूं। २०१४ की ९ मई को मेै गाजीपुर आया था। अगर उतर प्रदेश 2014 में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने में मदद न करता तो, न भ्रष्टाचारियों को तकलीफ होती न कालेधन वालों को चिंता होती।किसानों की जिंदगी में दोबारा रौनक पैदा करनी है। उनका शोषण न हो इसकी व्यवस्था की है। आज गरीब चैन की नींद सो रहा है और अमीर नींद की गोलियां ढूंढ रहे हैं। कहा कि कौन सी सही और कौन सी नकली बंद होने से यही भ्रष्टाचारी परेशान हैं।
कहा, जब मैं छोटा था तो लोग कहते थे कि मोदी, चाय जरा कड़क बनाना। मुझे कड़क चाय बनाने की आदत थी, निर्णय भी कड़क लेता हूं (जनता की ओर से मो...दी, मो...दी, मो....दी की गूंज)। आपने (कांग्रेस) चवन्नी बंद कर दी। क्या कहें, आप चवन्नी से आगे बढ़ नहीं पाते। आपने अपनी औकात का काम किया, मैंने अपने औकात का (जनता की ओर से फिर मो...दी, मो...दी, मो....दी की गूंज)।
मैं जानता हूं कि आम आदमी थोड़ा परेशान है। देखिए, कोई भी नया अच्छा काम करो तो तकलीफ होती है। हां, इरादा नेक होना चाहिए। हाथ उठाएं - क्या यह मैं देश की भलाई के लिए कर रहा हूं, राज्य की भलाई, आपकी भलाई, गांव की भलाई के लिए कर रहा हूं (जनता ने कहा - हां)। अब नेताओं को चढ़ने वाली नोटों की मालाएं नहीं दिख रहीं। ऐसी - ऐसी नोट की माला कि नेता की मुंडी ही नहीं दिखती थी। मध्य प्रदेश में एक बाबू के बिस्तर के नीचे से तीन करोड़ रुपये मिले। किसका पैसा है भाई। यह आपका पैसा है। अब गरीब और अमीर सब बराबर हो गए हैं। आम आदमी जरूर कुछ परेशान है मगर मैं रात को जागकर सोचता हूं कि आपकी तकलीफ कैसे कम हो। कुछ लोगों को जरा ज्यादा तकलीफ हो रही है। ये लोग मुंह पर कुछ नहीं बोलते, पीछे वाला दरवाजा तलाशते हैं। नेताओं में हिम्मत हो तो जनता के सामने आएं कि क्या भ्रष्टाचार चलना चाहिए। जनता को गुमराह न करें। कांग्रेस कहती है कि जनता को तकलीफ हो रही है। मैं कांग्रेस से पूछता हूं कि आपने तो 19 महीने आपातकाल लगाकर इस देश को जेलखाना बना दिया। आपने हिम्मत करने वाले अखबारों को ठिकाने लगा दिया था। लोगों के बोलने पर पाबंदी थी ...किस काम के लिए, यह काम केवल आपने कुर्सी से चिपके रहने के लिए किया था।
कहा, आज ही गंगा पुल पर काम शुरू हो गया, समय सीमा में काम पूरा होगा यह तय है। किसानों के लिए पेरिसेवल कार्गो शीत भण्डारण से अब कोई उनका दोहन नहीं कर सकेगा। उसे उसकी वाजिब कीमत मिलेगी। भारत में धन की कोई कमी नहीं है। समस्या यह है कि धन पड़ा कहां है। धन जहां होना चाहिए वहां नहीं है, जहां नहीं होना चाहिए वहां ढेर है। मैं 2014 की 9 मई को आपसे इसी गाजीपुर में वादा किया था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ूंगा। आपने मुझे प्रधानमंत्री बनाया, अब मैं आपसे किया अपना वादा पूरा कर रहा हूं। मैं 1000, 500 के नोट बंद कर भ्रष्टाचार पर लगाम लगा रहा हूं। हाथ उठाकर स्वयं बताएं कि यह सही है, आप इसके लिए मुसीबत झेलेंगे, कष्ट झेलेंगे (सबने हाथ उठाकर कहा - हां)। अब हिन्दुस्तान में बेइमानों के लिए कोई जगह नहीं है।

चाचा नेहरू को किया याद करते हुये कहा कि गाजीपुर (गहमर) के विश्वनाथ गहमरी को याद कर वह बहुचर्चित प्रसंग सुनाया जिसमें संसद में गहमरी जी ने जवाहरलाल को गाजीपुर की दुर्दशा सुनाई थी। गोबर से गेहूं का दाना चुनकर लोगों द्वारा खाने की बात बताई थी। पूरी संसद रोई थ्ज्ञी तब। तब पं नेहरू ने एक पटेल कमेटी बनाई जिसने रिपोर्ट दिया कि इलाके की भलाई के लिए क्या-क्या करना चाहिए। पंडित जी चले गए, न मालूम कितने चले गए। मैं यूपी से नौवां पधानमंत्री हूं। पटेल कमेटी की रिपोर्ट डब्बे में बंद रही। मैं आज चाचा नेहरू की जयंती पर (14 नवंबर) जान बूझकर यहां आया ताकि 1962 में आई उस पटेल कमेटी की रिपोर्ट को मैं आज लागू करने की शुरूआत कर रहा हूं। आपका दल मुझे गाली देता है, मगर आपकी जयंती पर आपकी रिपोर्ट को लागू करने की शुरूआत कर मैं आपको श्रद्धांजलि देता हूं।
भोजपुरी से अपने भाषण का शुभारंभ किया, गाजीपुर के महत्व को बताया। मुनियों को नमन किया, वीर अब्दुल हमीद को याद किया, छोटी लहुरी को नमन किया।
दो बरस पहले 9 मई को इसी गाजीपुर में मैंने आप सबसे कहा था कि मुझपर भरोसा करो, मेरा छोटा भाई (मनोज सिन्हा) यहां से चुनाव लड़ रहा है। आपने हमपर भरोसा किया। यदि हमें पूर्ण बहुमत आपने न दिया होता तो आज न भ्रष्टाचारियों को चिंता होती और नही काले धन वाले को। आज अमीर नींद की गोली खरीदने के लिए बाजार का चक्कर काट रहा है जबकि गरीब चैन की नींद सो रहा है।
...मैं आपके प्यार को पूरे ब्याज सहित लौटाएंगा। गोरखपुर का फर्टिलाइजर कारखाना उदाहरण है, एक लाश आज खड़ी हो गई है।
इसके पहले प्रधानमंत्री ने गाजीपुर पहुंचकर आयोजित समारोह में मऊ-ताड़ीघाट नई लाईन के मध्य गंगा नदी पर रेल सह सड़क पुल और गाजीपुर सिटी-बलिया रेलखंड के दोहरीकरण का शिलान्यास के साथ गाजीपुर सिटी-कोलकाता साप्ताहिक सुपरफास्ट 'शब्द भेदी ' एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया ।
सभा को संबोधित करते हुये रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि काले धन के कारण आजादी के बाद भी पुराना भारत नये भारत में बदल रहा है। यूपी में जितना तीन साल में रेलवे में निवेश हुआ उतना तीस साल में भी नहीं हुआ था। देश के लिए पुल इसलिए बनाए जाते हैं ताकि यातायात में सहूलियत हो। लोगों को लोगों से जोडने के लिए पुल काफी जरूरी है। रेलवे ने बीते कई सालो में जितना यूपी में निवेश नहीं किया उतना यूपी में बीते तीन सालों में निवेश किया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि सपा यहां केवल गुण्डा गर्दी कर रही है। मायावती पर भी तंज कसा कहा पीएम के फैसले से मोटा हाथी भैंस से भी पतला हो गया। कहा आप सभी जानते हैं भ्रष्टाचार ने देश में विकास को रोक रखा था। हम सब उत्तर प्रदेश की जनता हैं, सपा और बसपा के गुंडों की वजह से हम बहुत कुछ झेल चुके हैं। बहन जी कहती हैं कि नोट को रोने से भूकंप है, यह भूकंप आया तो है मगर हाथी इसके बाद भैंस से भी छोटा हो गया है।
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गाजीपुर पहुंचने के पहले बनारस के बाबतपुर हवाईअड्डे पहुचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हवाईअड्डे के एप्रन पर भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं से मुलाकात के दौरान कहा कि बनारस में लाइन लगकर नोट बदलने और जमा करने वालों को किसी प्रकार की समस्या न हो। यदि किसी को कोई समस्या होती है तो आप अपने स्तर से उसको तत्काल दूर करने का प्रयास करें। एप्रन पर पीएम से मुलाकात करने वालों में प्रदीप अग्रहरि, जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा, नागेंद्र रघुवंसी, जयनाथ मिश्रा, विद्याशंकर राय, धर्मेंद्र सिंह सहित बीजेपी के कुल नौ स्थानीय नेता शामिल रहे